पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर चीन का राग अलापा है। इमरान ने कहा है कि अमेरिका ने हमेशा अपने रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया है और जब उद्देश्य पूरा हुआ तो उसने देश पर प्रतिबंध लगा दिए जबकि ‘दोस्त’ चीन समय की कसौटी पर खरा उतरा।

‘द न्यूज इंटरनेशनल’ अखबार ने शुक्रवार को बताया कि पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान ने हाल ही में ‘चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ फुडन यूनिवर्सिटी’ की सलाहकार समिति के निदेशक एरिक ली के साथ एक साक्षात्कार के दौरान यह टिप्पणी की। एक सवाल के जवाब में खान ने कहा कि कई बार उनके देश के अमेरिका के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हालांकि, जब अमेरिका को लगता है कि उसे अब पाकिस्तान की जरूरत नहीं है तो वह उससे दूरी बना लेता है।

पाक-अमेरिका संबंधों का उदाहरण देते हुए उन्होंने 80 के दशक में तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में अपने सैनिकों को तैनात करने का उल्लेख करते हुए कहा, “जब भी अमेरिका को हमारी जरूरत पड़ी, उन्होंने संबंध स्थापित किए, और पाकिस्तान (सोवियत के खिलाफ) एक अग्रणी राज्य बन गया, और फिर उसे छोड़ दिया और हम पर प्रतिबंध लगा दिए।”

बीजिंग के शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए 3 से 6 फरवरी तक चीन की अपनी हालिया यात्रा के दौरान दिए गए साक्षात्कार के अंश के मुताबिक प्रधानमंत्री खान ने कहा कि बाद में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बहाल किए गए और इस्लामाबाद वाशिंगटन का मित्र बन गया।

खान ने कहा कि उस समय अमेरिका ने हमारी मदद की, लेकिन जैसे ही सोवियत संघ ने अफगानिस्तान छोड़ा, अमेरिका ने पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगा दिए। उन्होंने कहा कि जब 9/11 के आतंकी हमले हुए, तो अमेरिका-पाकिस्तान संबंध फिर से बेहतर हो गए। हालांकि, जब अमेरिका अफगानिस्तान में विफल रहा, तो हार के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच संबंध वैसे नहीं रहे हैं, इस्लामाबाद और बीजिंग सदाबहार सहयोगी हैं। खान ने कहा कि चीन एक दोस्त है, जो हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है। पिछले 70 वर्षों के दौरान दोनों देशों ने हर मंच पर एक-दूसरे का समर्थन किया है।



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