उत्तराखंड के चमोली जिले की चीन सीमा से जुड़े क्षेत्र में एक ग्लेशियर के टूटने से भारी तबाही मच गई। लगभग 170 लोग लापता हो गए। सात लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं और छह लोग घायल हैं। इनमें से ज्यादातर लोग रैंणी और तपोवन की बिजली परियोजनाओं से जुडे़ हैं। इसके अलावा, पीएम-सीएम ने कुल छह लाख के मुआवजे का ऐलान किया है। घटना के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अलावा एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना राहत और बचाव के काम में जुट गईं। वहीं, अलकनंदा और सहायक नदियों में आई बाढ़ के बाद बहाव अब नियंत्रण में है, इसलिए आसपास के गांवों को कोई खतरा नहीं है। उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ के बाद कैबिनट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की बैठक हुई। कैबिनेट सचिव ने सम्बंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वो निकट समन्वय में काम करे और राज्य प्रशासन को सभी अपेक्षित सहायता प्रदान करे। उन्होंने लापता लोगों की तलाश पर जोर दिया और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सुरंग में फंसे लोगों को बचाया जाए।
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1- उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से तबाही की खबर मिलते ही तीनों सेनाएं भी राहत कार्य में जुट गई। थल सेना ने जोशीमठ और ओली से सेना के दो-दो कॉलम ( करीब 400 जवान) तत्काल रैणी गांव भेजे और दो सौ जवानों को तैयार रहने को कहा गया है। इसके साथ ही सेना ने एनडीआरएफ की टीमों को मौके पर पहुंचाया। सेना के बयान के अनुसार आपदास्थल पर इंजीनियरिंग टास्क फोर्स की तैनाती भी की गई। जिनके पास दो जेसीबी भी है। दो एंबुलेंस के साथ एक मेडिकल टीम तैयार की गई तथा एक फील्ड अस्पताल स्थापित किया गया ताकि घायलों का तत्काल उपचार शुरू किया जा सके।
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2- पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार ने ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ के कारण मची तबाही पर दुख जताते हुए कहा कि ऋषि गंगा प्रोजेक्ट में कार्यरत 50 से अधिक कर्मचारी लापता हो गए हैं। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मलबे में दबे लोगों को ढूंढने में लगी हुई है। रविवार को अल्मोड़ा पहुंचे डीजीपी ने कहा कि चमोली जिले के जोशीमठ में ग्लेशियर फटने से बाढ़ त्रासदी आई है। यह काफी घटना दुखद है। पुलिस प्रशासन, एसडीआररफ और बचाव दलों को राहत और बचाव कार्य में तेजी से जुटने के लिए निर्देश दिया है। कहा कि इस सैलाब ने ऋषि गंगा प्रोजेक्ट को पूरा तबाह कर दिया है।
3- ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचा है। आईटीबीपी ने टनल में फंसे 12 लोगो का सुरक्षित बचाया है। बाकी लोगों की तलाश जारी है। मुख्य सचिव ने बताया कि मौसम विभाग ने बताया है कि इस क्षेत्र में बारिश की संभावना नहीं है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में गृह सचिव, ऊर्जा मंत्रालय के सचिव, एनडीआरएफ के चैयरमेन और केंद्रीय जल आयोग के अधिकारी मौजूद थे।
4- चमोली के ऋषिगंगा कैचमेंट एरिया में रविवार सुबह दस बजे ग्लेशियर टूटने से मची तबाही के बाद सरकार ने रेड अलर्ट घोषित कर दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर मौके लिए रवाना हो गए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात की और तत्काल मदद मांगी। केंद्र से सेना की चार टुकड़ियां व मेडिकल टीमें हेलीकाप्टरों से पहुंच राहत व बचाव में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र को जब इस आपदा की जानकारी मिली, उस दौरान वे दून में रेलवे ओवर ब्रिज के शिलान्यास कार्यक्रम में थे, कार्यक्रम बीच में ही छोड़ जिला, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट करते हुए मौके का जायजा लेने निकल पड़े।
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5- जानकारी मिलते ही सीएम त्रिवेंद्र ने दोपहर करीब सवा बारह बजे तत्काल केंद्रीय गृह मंत्री शाह से बात की और पूरी स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने राहत व बचाव के लिए सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ की मदद मांगी। शाह ने आईटीबीपी और एनडीआरएफ के महानिदेशकों से बात की और पीड़तिों की मदद के लिए युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए।
6- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने के कारण आई बाढ़ में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के निकट परिजन को रविवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से दो-दो लाख रूपये की अनुग्रह राशि प्रदान करने को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक ट्वीट में यह जानकारी दी गई है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये का भी मुआवजा देने की घोषणा की। इस तरह से कुल छह लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान हुआ है।
7- उफान को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने श्रीनगर स्थित जीवीके और ऋषिकेश डैम का पानी खाली कराना शुरू कर दिया था। हालांकि, दोनों डैम से नियंत्रित तरीके से पानी छुड़वाया गया। सरकार का मानना था कि यदि सैलाब अधिक आता है तो दोनों डैमों में पानी रोककर इसके रोद्ररूप को कम किया जा सकता है। ताकि मैदानी इलाकों में नुकसान होने से बचाया जा सके।
8- सरकार ने एहतियात के तौर पर टिहरी बांध से भागीरथी नदी का फ्लो रुकवा दिया है। शुरूआत में सरकार यह आंकलन नहीं कर पाई थी कि ग्लेशियर टूटने की वजह से किस स्पीड में मंदाकिनी में पानी का उफान रहेगा। देवप्रयाग में अलकनंदा व मंदाकिनी का संगम है। गंगा में पानी का उफान कम करने के लिए सरकार ने भागीरथी नदी फ्लो रोकने के लिए कदम उठाया।
9- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रातः अचानक जोर जोर की आवाजों के साथ धौली गंगा का जलस्तर बढ़ता दिखा। पानी तूफान की शक्ल में आगे बढ़ रहा था और वह अपने रास्ते में आने वाली सभी चीजों को अपने साथ बहा कर ले गया। रैंणी में एक मोटर मार्ग तथा चार झूला पुल बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं । सात गांवों का संपर्क टूट गया है जहां राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य सेना के हैलीकॉप्टरों के जरिए किया जा रहा है।
10- वहीं, वर्ष 2019 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दावा किया गया था कि तापमान में वृद्धि के कारण 21वीं सदी की शुरुआत के बाद से ही हिमालय के हिमखंड (ग्लेशियर) दोगुनी तेजी से पिघल रहे हैं, जिसके चलते भारत समेत विभिन्न देशों के करोड़ों लोगों को जलापूर्ति प्रभावित होने का सामना करना पड़ सकता है।







