देश में वैकल्पिक और नई ऊर्जा के स्रोतों को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार बजट में अपने खजाने खोलने की तैयारी में है। वित्तमंत्री अगले हफ्ते पेश किए जाने वाले बजट में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना यानि पीएलआई स्कीम का दायरा बढ़ा सकती हैं। साथ ही पीएलआई के दूसरे क्षेत्रों से जुड़े घरेलू उत्पादन कर्ताओं को सस्ता कच्चा माल मुहैया कराने का भी रोडमैप पेश किया जाना है।
सूत्रों के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक बजट में एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टपल कॉटन पर आयात शुल्क घटाया जा सकता है। मौजूदा समय में इस पर 10 फीसदी आयात शुल्क है। वहीं घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिले ऐसे में, मेडिकल डिवाइसों पर आयात शुल्क बढ़ भी सकता है। सरकार को उद्योग जगत की तरफ से इसे 15 फीसदी बढ़ाने के सुझाव दिय गए हैं।
मौजूदा समय में अलग-अलग मेडिकल डिवाइसेज पर शून्य से लेकर साढ़े सात फीसदी तक आयात शुल्क का प्रावधान है। सरकार इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल को बढ़ावा देने के अपने मिशन के तहत सेल बैट्रीज से जुड़े कच्चे माल को सस्ता करने का भी ऐलान कर सकती है। इसके लिए ग्रेफाइट, कोबाल्ट, लीथियम और निकिल जैसी चीजों के ऊपर से आयात शुल्क कम किया जा सकता है।
बजट में आवंटन बढ़ाने की तैयारी
इसके अलावा केंद्र सरकार इस बजट में पहले से चल रही पीएलआई योजनाओं के फंड में भी इजाफा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों के लिए ये आवंटन बढ़ाया जा सकता है। मौजूदा समय में इस क्षेत्र के लिए 5 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। आने वाले बजट में पूरे क्षेत्र के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की मांग की गई है।
वहीं सोलर फोटोवोल्टिक यानि सोलर पीवी के लिए भी आवंटन बढ़ाया जा सकता है। इस सेक्टर में अब तक 25 हजार करोड़ रुपए के इंसेंटिव के लिए आवेदन आ चुके हैं। वहीं अब तक बजट आवंटन 4500 करोड़ रुपए ही है। ऐसे में सरकार इस दिशा में भी अपने खजाने खोल सकती है।







