छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा के तहसील सौसर के निमनी गांव के लोग आज भी जान जोखिम में डालकर नदी को तुम्बा के सहारे पार कर खेती के लिए झिरौरा गांव जाने को मजबूर हैं। करीब ढाई हजार की आबादी वाले निमनी गांव के अधिकांश लोग पेट भरने के लिए खेती पर निर्भर हैं लेकिन उनके खेत नदी के उस पार झिरौरा गांव में हैं। समस्या यह है कि निमनी से जिरौरा जाने के लिए कोई रास्ता या पुल नहीं है। दोनों गांवों के बीच से होकर कन्हान नदी निकलती है और गांववाले इसे तुम्बा के सहारे पार करते हैं। यह उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है।

Bhind: अवैध रेत खनन के खिलाफ पूर्व मंत्री का धरना, अपनी पार्टी की सरकार रहते मांग चुके हैं माफी

गोल आकार की तुम्बा लौकी को सुखाकर बनाई जाती है और वह नदी के तेज बहाव के बीच से निकलने में गांववालों का एकमात्र जरिया है। एक या दो लौकी को जोड़कर तैयार किया गया तुम्बा सामान्य वजन के लोगो के लिए नदी का बहाव काटने के लिए काफी है। भारी वजन वाले या एक से अधिक लोगों के लिए चार तुम्बा को आपस में रस्सी से जोड़कर बनाया जाता है। यह ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यदि पानी के बहाव के चलते कभी व्यक्ति पलट गया तो फिर सीधा होना नामुमकिन है।

यूपी के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा ने फिर दोहराया डर- मेरी हत्या हो सकती है

ग्रामीणों का कहना है कि वे झिरौरा जाना नहीं छोड़ सकते। उन्होंने अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से पुल बनवाने की अपील की, लेकिन देश की आजादी के 74 साल बाद भी वे रोज खतरों से जूझकर आते-जाते हैं। पिछले साल तुम्बा पलटने की वजह से अलग अलग हादसों में दो लोगो की मौत हो गई थी, लेकिन प्रशासन के कानों पर जू नहीं रेंगी।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here