कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि अप्रैल 2020 से जून 2021 के बीच कुल 16,527 कंपनियां बंद हुई। उन्होंने कहा कि कंपनीज एक्ट 2013 के सेक्शन 248 के हिसाब से अप्रैल 2020 से जून 2021 के बीच 16,527 कंपनियां रजिस्टार ऑफ कंपनीज के आंकड़ों से हटा दी गई हैं। कंपनी कानून के सेक्शन 248 के हिसाब से कोई कंपनी कुछ शर्त पूरी करने के बाद ही ऑफिशल रिकॉर्ड से हटाई जा सकती हैं। इन शर्त में कई बातें शामिल है। मंत्री ने कहा कि इस कानून के तहत शटडाउन या क्लोज्ड यूनिट या कॉर्पोरेट यूनिट की परिभाषा नहीं तय की गई है।
फेक्टर विनियमन संशोधन विधेयक को मंजूरी
विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच लोकसभा ने सोमवार को फेक्टर विनियमन संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को कर्ज सुविधा प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त रास्ते सुलभ कराने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक को सदन से पारित करने की अपील करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2011 के कानून में सरकार कुछ संशोधन कर रही है। यू के सिन्हा समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में तीन संशोधन लाए गए हैं।
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इस विधेयक को 14 सितंबर 2020 को लोकसभा में पेश किया गया था। बाद में इसे स्थायी समिति को भेजा गया था, जहां सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा एमएसएमएई को इससे लाभ मिलेगा । मैं अपील करती हूं कि आप लोग इस संशोधन विधेयक को पारित करें। शोर शराबे के बीच ही निचले सदन ने फेक्टर विनियमन संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी। जब एक पक्ष अपनी प्राप्तियां, जिनका भुगतान अभी नहीं किया गया है, उसे किसी दूसरे पक्ष को बेच देता है तो उसे फैक्टरिंग कहा जाता है। विधेयक के बारे में वर्ष 2019-20 तथा वर्ष 2020-21 के बजट संबोधन में घोषणा की गई थी।
बैंकों पर एनपीए का बोझ कम हुआ
वित्त राज्य मंत्री भागवत किशनराव कराड़ ने लोकसभा में सोमवार को बताया कि 31 मार्च, 2021 के अंत तक बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) या खराब ऋण 61,180 करोड़ रुपये घटकर 8.34 लाख करोड़ रुपये हो गया है। मार्च 2020 के अंत तक सरकारी बैंकों का कुल 8.96 लाख करोड़ रुपये था।







