दूरसंचार उद्योग के शोध संस्थान ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) का मानना है कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर फैसले के बाद अब कंपनियां निश्चिंतता के साथ अपनी कारोबारी योजनाओं को आगे बढ़ा सकती हैं। इसके साथ ही बीआईएफ ने कहा कि दूरसंचार विभाग को अब क्षेत्र में कारोबार सुगमता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे इसे मुनाफे में लाया जा सके और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। इसके अलावा बीआईएफ ने भारी-भरकम शुल्कों को भी कम करने की वकालत की है।
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बीआईएफ ने दूरसंचार विभाग से उन सिफारिशों पर तेजी से काम करने का आग्रह किया है जो क्षेत्र के नियामक द्वारा उसे सौंपी जा चुकी हैं। इनमें ब्रॉडबैंड के प्रसार के लिए सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क की सिफारिश भी शामिल है। बीआईएफ ने कहा कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों पर निर्णय में देरी की काफी ऊंची आर्थिक लागत बैठेगी। वह भी ऐसे समय, जब देश तेजी से डिजिटल बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।
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बीआईएफ के अध्यक्ष टी वी रामचंद्रन ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”एजीआर पर फैसले के बाद सांविधिक बकाया के मुद्दे में स्पष्टता आ गई है। अब उद्योग अपनी कारोबारी योजना पर आगे बढ़ सकता है। रामचंद्रन ने कहा, ”सरकार को अब देखना होगा कि उद्योग को कैसे अधिक मुनाफे में लाया जा सकता है और कैसे निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है। अंतत: यदि आप देश में निवेश लाना चाहते हैं, तो आपको अपने यहां के कारोबारी माहौल को आकर्षक बनाना होगा।







