मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत आयात किये जाने वाले सामान के दस्तावेजों की सीमाशुल्क विभाग सोमवार से कड़ी जांच करेगा। इस कवायद का मकसद एफटीए के तहत आयातकों को मिलने वाली कर छूट के गलत इस्तेमाल को रोकना है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अब आयातकों को घरेलू सीमाशुल्क अधिकारियों को इस बात के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराने होंगे कि जिस देश से सामान भारत में आयात किया गया उसने आयातित उत्पाद में कम से कम 35 प्रतिशत मूल्यवर्द्धन किया है।

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उदाहरण के लिए यदि किसी मोबाइल को इंडोनेशिया से भारत में आयात किया जाता है तो केवल ऐसे मोबाइल फोन के आयात को अनुमति होगी, जिसका मूल उत्पादन इंडोनेशिया में हुआ है और इंडोनेशिया में इसके उत्पादन में कम से कम 35 प्रतिशत का मूल्यवर्द्धन किया गया है। सूत्रों ने कहा कि यह आयातकों की जिम्मेदारी होगी कि वह जिस सामान का आयात कर रहे हैं, उसके बारे में सुनिश्चित करें कि उसका विनिर्माण या उत्पादन निर्यात किए जाने वाले देश में हुआ है और उसमें न्यूनतम 35 प्रतिशत का मूल्यवर्द्धन उसी देश में किया गया है।

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इस बारे में आयातक को सभी दसतावेजी सबूत पेश करने होंगे और इसमें यह साबित करना होगा कि जिस देश से आयात किया गया है उसमें 35 प्रतिशत मूल्यवर्धन आवश्यकता को पूरा किया गया है। केवल माल का ”उत्पति प्रमाणपत्र दिखाना ही काफी नहीं होगा। सूत्रों ने कहा कि सरकार के इस कदम की वजह घरेलू उद्योगों के कुछ तबकों की ओर 10 देशों के समूह आसियान के साथ हुये एफटीए के दुरुपयोग की लगातार की जा रही शिकायतें हैं। भारत का 10 देशों के दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के समूह आसियान के साथ मुक्त व्यापार समझौता है। आसियान में इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, म्यांमार, कंबोडिया, ब्रुनेई और लाओस शामिल हैं।



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