हाइलाइट्स:

  • आईसीएमआर और भारत बायोटेक की ओर से विकसित वैक्सीन है ‘कोवैक्सीन’
  • ‘कोवैक्सीन’ का दिल्ली, पटना एम्स और रोहतक पीजीआई समेत अन्य संस्थानों में चल रहा ह्यूमन ट्रायल
  • 25 साल के अमित गर्ग के साथ उनके परिवार के चार और सदस्य भी ह्यूमन ट्रायल के लिए बने वालंटियर

मेरठ
आईसीएमआर और भारत बायोटेक की ओर से विकसित देसी वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ (Covaxin) का दिल्ली, पटना एम्स और रोहतक पीजीआई समेत अन्य संस्थानों में ह्यूमन ट्रायल चल रहा है। ऐसे में दिल्ली का एक परिवार वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए आगे आया है। 25 साल के अमित गर्ग ने पहले वालंटियर बनने के लिए हस्ताक्षर किए। इसके बाद उनके परिवार के चार और सदस्यों ने भी ह्यूमन ट्रायल के लिए वालंटियर बनने का फैसला किया और दिल्ली एम्स जाकर अपनी मंजूरी दे दी।

अमित गर्ग का परिवार दशकों से वैक्सीन वितरण के कारोबार में है। उन्होंने बताया कि इस महीने की शुरुआत में वह एक मैन्युफैक्चरर से मिलने गए थे। इस दौरान जब उन्होंने सुना कि पहले चरण के दो टेस्टों के लिए पर्याप्त लोग नहीं मिले तो उन्होंने ह्यूमन ट्रायल के लिए वालंटियर बनने का फैसला किया और दो दिन बाद एक लैब में जाकर वालंटियर बनने के लिए साइन किए।

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मानवता के लिए योगदान देने का समय: अमित गर्ग
दिल्ली के रहने वाले अमित गर्ग ने कहा कि मुझे पता है कि इस महामारी का मुकाबला करने के लिए एक टीका कितना महत्वपूर्ण है। मैंने अंदरूनी सूत्रों से सुना कि टेस्ट में पर्याप्त वालंटियर नहीं हैं। मुझे एहसास हुआ कि यह मानवता के लिए अपना योगदान देने का समय है। ऐसे में मैंने अपने 34 वर्षीय बहनोई कुशल अग्रवाल, भाई सार्थक गुप्ता 43 वर्षीय और दो भतीजों अमन गुप्ता और सम्भव गुप्ता के साथ 10 सितंबर को एम्स दिल्ली जाकर वालंटियर बनने के लिए साइन किए।

अगले महीने वैक्सीन का एक बूस्टर डोज मिलेगा: सार्थक
अलवर में रहने वाले सार्थक ने कहा कि हम थोड़ा आशंकित थे, लेकिन मैंने आने वाले कल को देखा। अगर टीका काम करता है, तो मैं इसे पाने वाले पहले लोगों में से हूं। टेस्ट के लिए उपयुक्त समझने से पहले परिवार का मेडिकल टेस्ट की पूरी प्रक्रिया हुई। कहा कि उन्हें अगले महीने वैक्सीन का एक बूस्टर डोज मिलेगा।

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दिल्ली में परिवार के साथ रहते थे वालंटियर बने कुशल
दिल्ली में अपनी पत्नी और तीन साल के बेटे के साथ रहने वाले कुशल ने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान परिवार के सदस्य एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ा रहे हैं। शुरुआत में मैं वैक्सीन के दुष्प्रभावों से चिंतित था। लेकिन अपने परिवार के साथ चर्चा के बाद राहत महसूस किया।



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