आतंकवादियों के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान, भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती और कोविड प्रतिबंधों के बीच जम्मू-कश्मीर में साल 2019 के बाद से पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी कमी देखने को मिली है। गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से जुलाई के बीच पत्थरबाजी की घटनाएं साल 2019 की तुलना में 88 फीसदी घट गई हैं। इसके अलावा इस तरह की घटनाओं में घायल या चोटिल होने वाले सुरक्षाबलों के जवानों और नागरिकों की संख्या भी 93 प्रतिशत से घटकर 84 प्रतिशत हो गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, गृह मंत्रालय के डेटा बताते हैं कि साल 2019 में जनवरी से जुलाई माह के बीच पत्थरबाजी की 618 घटनाएं हुई थीं। वहीं, साल 2020 में इसी अवधि में 222 बार पत्थरबाजी की गई। यह आंकड़ा इस साल सिर्फ 76 तक सिमट गया है। सुरक्षाबलों के चोटिल होने के मामले भी साल 2019 में 64 थे तो वहीं इस साल यह सिर्फ 10 हैं। 

सबसे ज्यादा कमी पैलट गन और लाठी चार्ज में घायल होने वाले आम नागरिकों की संख्या में आई है। साल 2019 में जहां यह आंकड़ा 339 था तो वहीं इस साल यह सिर्फ 25 रह गया है। 

आतंकियों के सफाए के लिए चलाए जा रहे सैन्य मिशन भी अब रंग ला रहे हैं। इस अवधि में आतंकवादियों की गिरफ्तारी बढ़ी है। साल 2019 के जनवरी से जुलाई माह के बीच जहां सिर्फ 82 आतंकी पकड़े गए थे तो वहीं इस साल अब तक 178 आतंकियों को पकड़ा जा चुका है। 

बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करते हुए इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में 72 दिनों तक इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद रही थीं। वहीं, 4जी सेवाएं 18 महीने बाद इस साल फरवरी में बहाल की गई थीं। 

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाल ही में आदेश दिया था कि जो लोग पत्थरबाजी में शामिल पाए जाएंगे उन्हें पासपोर्ट और सरकारी नौकरियों के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस नहीं मिलेगा।



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