कश्मीर में हाल के दिनों गैर मुस्लिम लोगों को निशाना बनाकर कई आतंकवादी हमले किए गए। इसमें एक मुस्लिम सहित छह लोगों की अब तक जान गई है। इस घटना की हर तरफ निंदा हो रही है। कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा हाल में की गई हत्याओं को लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने भी निंदनीय कहा है।

जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), चिनार कोर ने कहा कि मुझे विश्वास है कि कश्मीरी उन तत्वों को बेनकाब करेंगे जो कश्मीरी समाज को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं।

कश्मीर छोड़ रहे हैं लोग
कश्मीर घाटी में बीते कुछ दिनों में गैर-मुस्लिमों पर आतंकवादी हमले बढ़ने से केंद्र शासित प्रदेश के अल्पसंख्यकों में भय का माहौल है। एक तरफ केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार विस्थापितों को बसाने की बात कर रही है, लेकिन आतंक की नई लहर के चलते दोबारा पलायन शुरू हो गया है। अध्यापकों और कारोबारियों तक पर हुए हमलों से दहशत में आए सिख और कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग जम्मू लौट रहे हैं, जहां गैर-मुस्लिमों की बहुलता है। शिक्षकों समेत अन्य सरकारी कर्मचारी जम्मू लौट रहे हैं और कुछ ने घाटी से बाहर ट्रांसफर की मांग की है। इसके अलावा कई तो सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं की वजह से काम पर ही नहीं आ रहे हैं।

हिरासत में करीब 600 लोग
जम्मू कश्मीर में हत्याओं की श्रृंखला के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई में जुटी पुलिस ने घाटी में पिछले कुछ दिनों में विभिन्न छापों में करीब 600 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में भूतपूर्व भूमिगत कार्यकर्ता और पूर्व आतंकवादी भी शामिल हैं, जो पहले पथराव में शामिल और अलगाववादियों से जुड़े हुए थे। सूत्रों ने कहा कि बड़े पैमाने पर कार्रवाई का उद्देश्य नागरिक हत्याओं की श्रृंखला को तोड़ना है। पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि हालिया आम नागरिकों की हत्या के मामले में सुराग मिल सके।

कश्मीर में इस महीने आतंकियों ने आम नागरिकों पर हमले तेज कर दिए हैं। पिछले एक सप्ताह में विभिन्न हमलों में अल्पसंख्यक समुदाय के चार सदस्यों सहित सात नागरिक मारे गए हैं। पुलिस इन हत्याओं के लिए प्रतिरोधक मोर्चा को जिम्मेदार ठहराती है, जिससे पूरे कश्मीर में अल्पसंख्यकों में डर पैदा हो गया है।

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