कांग्रेस ने प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारत के बांग्लादेश से पिछड़ने संबंधी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमान को लेकर शुक्रवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस आंकड़े के सामने आने के बाद केंद्र सरकार झूठ फैलाने में लगी है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी कहा कि सरकार को अब भी यह समझ नहीं आ रहा है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उपभोग को बढ़ाना पड़ेगा।

सुप्रिया ने संवाददाताओं से कहा, ”पिछले कुछ दिनों में बड़े ही परेशान करने वाले आर्थिक आंकड़े सामने आए हैं।” आईएमएफ ने कहा है कि भारत में इस वित्तीय वर्ष में आर्थिक वृद्धि की अनुमानित दर में लगभग 10.3 प्रतिशत संकुचन होगा, जो कि आईएमएफ के पहले के 4.5 प्रतिशत के अनुमानित संकुचन से बहुत अधिक है। उसके आंकड़ों की माने तो भारत विश्व की सबसे तेज़ी से गिरने वाली अर्थव्यवस्था होगी।

सुप्रिया ने दावा किया, ”बांग्लादेश ने आज हमें ही आर्थिक मामलों में पछाड़ दिया है। यह सच है कि बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से आगे है। इसका मोटा-मोटा मतलब यह है कि एक आम बांग्लादेशी आज एक आम भारतवासी से ज्यादा संपन्न है।” उनके मुताबिक बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,888 डॉलर है जबकि भारत का 1,876 डॉलर है। मात्र 5 साल पहले भारत का यही आंकड़ा बांग्लादेश से लगभग 25 प्रतिशत अधिक होता था।

उन्होंने कहा, ”अर्थव्यवस्था को संभालने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मोदी सरकार झूठ फैलाने पर तुल गई है और मुद्दे पर पर्दा डालने की विफल कोशिश में उलझी हुई है। सरकार के तमाम प्रवक्ता, पार्टी के शीर्ष नेता और पूरी की पूरी सोशल मीडिया आर्मी यह कह रहे हैं कि प्रति व्यक्ति भले बांग्लादेश का हम से अधिक हो लेकिन पीपीपी (क्रय शक्ति समता) में भारत बांग्लादेश से आगे है।”

सुप्रिया ने कहा, ”इससे बड़ी विडंबना दूसरी क्या होगी किस तरह का दुष्प्रचार करके ध्यान बांटा जा रहा है क्योंकि पीपीपी किसी भी देश की मुद्रा की असली कीमत होती है और वह भी विकसित देश की मुद्रा जैसे कि यूरो या डॉलर के मुकाबले। जबकि प्रति व्यक्ति जीडीपी ही वाकई में किसी भी देश के लोगों की समृद्धि उनकी संपन्नता का वास्तविक मानक होता है।”

उन्होंने यह दावा भी किया, ”जब अमेरिका और चीन की व्यापार युद्ध चल रहा था तब बांग्लादेश वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों ने उसका बड़ा लाभ उठाया और हमारी सरकार ने अपनी विफलताओं, गलत नीतियों के चलते निर्यात क्षेत्र को कुंठित करके रख दिया, हम उस व्यापार युद्ध का एक तिनका लाभ भी नहीं उठा पाए।”



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