कानपुरः  कानपुर मुंठभेड़ का मुख्य आरोपी विकास दुबे फरार है. उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी चप्पे-चप्पे पर तलाश कर रही है. इस बीच विकास दुबे को लेकर कई जानकारियां सामने आ रही हैं. दुबे को लेकर ऐसे ही कुछ खुलासे लल्लन बाजपेयी ने किए. बाजपेयी और दुबे में लंबी दुश्मनी चली आ रही है.

हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के बिकरु गांव का रहने वाला है जबकि लल्लन बाजपेयी शिबली गांव के रहने वालें. इस न्याय पंचायत के लल्लन बाजपेयी 1995 से 2017 तक लगातार अध्यक्ष रहे हैं.

लल्लन बाजपेई के मुताबिक 1995 में जब उन्होंने अपना अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा किया तो फिर दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे कि विकास ने उन पर हमला करवाया। वाजपेयी का कहन है कि दुबे उन्हें मरवाकर अपने किसी आदमी को अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाना चाहता था. लल्लन का कहना है कि दुबे के साथ उनकी दुश्मनी तब शुरू हुई जब दुबे ने उनकी न्याय पंचायत में लोगों को धमकाना, डराना शुरू कर दिया.

लल्लन ने बताया कि 2002 में वह अपने घर पर चौपाल लगाकर बैठे थे उनके साथ चाल लोग और जब अचानक बाइक सवाल बदमाश वहां आ पहुंचे और बम मारना शुरू दिया और फायरिंग भी की. उन्होंने बताया कि इस हमले में तीन लोग मारे गए. उन्होंने बताया कि उन्हें भी कई छर्रे लगे थे जिससे उनका कान कई दिनों तक खराब रहा था.

लल्लन ने बताया कि विकास दुबे को इलाके में सब पंडित जी कहकर बुलाते हैं. उन्होंने बताया कि करीब 17 साल की उम्र में विकास दुबे ने पहली हत्या की थी जिसकी उसे कोई सजा नहीं हुई इसके बाद उसका हौसला बढ़ता गया. 1991 में उसने अपने ही गांव की झुन्ना बाबा की भी हत्या कर दी क्योंकि वह बाबा की जमीन हड़पना चाहता था. इसके बाद 1993 में रामबाबू हत्याकांड, 2000 में सिद्धेश्वर पांडेय हत्याकांड, 2001 में राज्यमंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड को उसने अंजाम दिया.

लल्लन के मुताबिक विकास का इलाके में दबदबा बन गया था. उन्होंने बताया कि विकास हथियारों का शौकीन था. वह गाड़ियों के काफिले में निकलता था और उसके साथ 10-15 लड़के होते थे हथियार लिए होते थे.

लल्लन ने एक और चौंकाने वाली बता बताई कि विकास के पैरे में रॉड पड़ी हुई है और वह 500 मीटर पैदल भी नहीं चल सकता. लल्लन के मुताबिक सहारनपुर में एक विवादित जमीन की दलाली खाने विकास वहां पहुंचा तो दांव उल्टा पड़ गया और सामने वाली पार्टी उस पर भारी पड़ गई. यही उसका पैर टूट गया था जिसके बाद उसके पैर में रॉड डाली गई.

लल्लन का यह भी कहना है कि विकास के साथ हमेशा 20 से 25 लड़कों का जत्था चलता था. वह पहले नवयुवकों को महंग कपड़ों, शराब, मोबाइल आदि देता था और जब युवकों को इसकी लत लग जाती थी तो वह इन्हें अपने गिरोह में शामिल कर लेता था.

लल्लन का यह भी कहना है कि विकास अपने गांव में किसी को परेशान नहीं करता है और उसकी किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है. पिछले 15 सालों से उसके घर में ही प्रधानी रही है तो गांव वालों की जरूरत के मुताबिक सबकी सरकारी योजनाओं से लेकर रुपए-पैसे तक की मदद करता था.

बता दें उत्तर प्रदेश के कानपुर में विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. मुठभेड़ में पांच पुलिसकर्मी, होमगार्ड का एक जवान और एक आम नागरिक घायल भी हुए हैं.

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