उद्योग संगठन सीआईआई की राष्ट्रीय परिषद में दस सप्ताह शामिल होने वाले शीर्ष 115 कंपनियों के सीईओ ने कारोबारी धारणा में सुधार होने तथा कंपनियों के प्रदर्शन में क्रमिक तेजी आने के संकेत दिए हैं। सीआईआई ने रविवार को कहा कि एक सर्वेक्षण में ये मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शामिल हुए। सर्वेक्षण में शामिल सीईओ धातु और खनन, विनिर्माण, वाहन, फार्मा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, निर्माण और अग्रणी सेवा क्षेत्र जैसे आईटीईएस, स्वास्थ्य आतिथ्य पर्यटन और ई-कॉमर्स आदि के प्रतिनिधि थे।
यह भी पढ़ें: वित्त मंत्रालय: सुधारों से आर्थिक बुनियाद मजबूत होगी
उद्योग संगठन ने कहा,भारतीय अर्थव्यवस्था के लगातार उबरने का सिलसिला जारी है क्योंकि कॉरपोरेट इंडिया देश के कई हिस्सों में लॉकडाउन के साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू कर रहा है। उसने कहा कि भारतीय उद्योग जगत अब इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 50 प्रतिशत से अधिक की क्षमता के उपयोग का अनुमान लगा रहा है।
हालांकि, सीआईआई के अनुसार, केंद्र और राज्यों दोनों सरकारों को जीवन के अलावा आजीविका पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी। इसके लिए राज्यों के साथ-साथ जिलों द्वारा बार-बार लॉकडाउन लगाये जाने को रोकने के प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। संगठन ने कहा कि लॉकडाउन न केवल आर्थिक गतिविधियों के पुनरुद्धार को बाधित करता है, बल्कि जीवन के मुद्दे पर वांछित परिणाम भी नहीं देता है।
यह भी पढ़ें: जीएसटी परिषद की बैठक आज, जानें किन मुद्दों पर हो सकता है फैसला
सीआईआई ने कहा,अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खोलने की मांग करना जरूरी है, जिससे क्षमता के उपयोग में तेजी आयेगी। सीआईआई ने कहा कि केंद्र और आरबीआई द्वारा घोषित सुधारों व पुनरुद्धार के उपायों के साथ-साथ अधिकांश आर्थिक गतिविधियों के अनलॉक होने से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में व्यावसायिक भावनाओं में धीरे-धीरे सुधार हुआ है।
कारोबार में लौट रहा है आशावाद
कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था में सुधार की गति धीमी होगी लेकिन कर्ज की मांग व ऋण के उठाव में सुधार आने से आशा जगने के संकेत मिलते हैं। निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) अमिताभ चौधरी ने यह राय व्यक्त की है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संदेह जाहिर किया कि सरकार अर्थव्यवस्था के लिए राहत के अतिरिक्त उपाय करने वाली है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था एल आकार में उबरेगी।
यह भी पढ़ें: सोना 45000 तक आएगा या और ऊपर जाएगा, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
यदि कोई अर्थव्यवस्था तेजी से गिरने के बाद तेजी से उबरती है, तो इसे अर्थशास्त्र में ‘वी आकार का सुधार कहा जाता है। इसी तरह यदि कोई अर्थव्यवस्था गिरावट के बाद कुछ समय तक सुस्त रहती है और उसके बाद तेजी से उबरती है तो इसे ‘यू आकार का सुधार कहते हैं। हालांकि जब अर्थव्यवस्था अचानक मंद पड़ने के बाद उबरने में लंबा समय लगाती है, तो इस स्थिति को ‘एल आकार का सुधार कहते हैं।
चौधरी ने एक बातचीत में कहा, मेरा आकलन है कि वृहद आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है, विशेष रूप से पिछले महीने में। मैं आशावाद की स्पष्ट वापसी देख रहा हूं। जब मैं विभिन्न संगठनों के सीईओ के साथ बातचीत करता हूं और जब नये ऋण के बारे में जानकारियां जुटाने, क्रेडिट कार्ड के खर्च तथा नए खाते खाले जाने आदि को देखता हूं, तब यह स्पष्ट हो जाता है।







