भारतीय जनता पार्टी की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को दावा किया कि नई दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में सत्ताधारी दल के नजदीकी लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की विश्वसनीयता खत्म करने के लिए हिंसा कराई गई थी।

पवार ने एक कार्यक्रम में किसानों की मांग न मानने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान (दिल्ली बॉर्डर पर) शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं। किसी किसान ने कानून हाथ में नहीं लिया। आंदोलन की विश्वसनीयता समाप्त करने के लिए एक घटना (26 जनवरी की) हुई। उसमें किसान शामिल नहीं थे। शिकायतों के अनुसार, हिंसा में शामिल लोग सत्ताधारी पार्टी से जुड़े थे।

बता दें कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों पर चिंता प्रकट करते हुए राकांपा प्रमुख शरद पवार पहले ही कह चुके हैं कि ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे और मंडी प्रणाली को कमजोर कर देंगे। उन्होंने एमएसपी को सुनिश्चित करने और इस व्यवस्था को कहीं अधिक मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। 

शरद पवार ने ट्वीट कर कहा था कि सुधार एक सतत प्रक्रिया है और एपीएमसी या मंडी प्रणाली में सुधारों के खिलाफ कोई भी व्यक्ति दलील नहीं देगा, लेकिन इस पर एक सकारात्मक बहस का यह मतलब नहीं है कि यह प्रणाली को कमजोर या नष्ट करने के लिए है।

पूर्व कृषि मंत्री ने ट्वीट कर कहा था कि मेरे कार्यकाल के दौरान, विशेष बाजार स्थापित करने के लिए मसौदा एपीएमसी नियमावली-2007 तैयार की गयी थी, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचेने के लिए वैकल्पिक मंच उपलब्ध कराया जा सके और मौजूदा मंडी प्रणली को मजबूत करने के लिए भी अत्यधिक सावधानी बरती गई थी। पवार, 2004 से 2014 तक केंद्रीय कृषि मंत्री रहे थे। उन्होंने कहा कि वह संशोधित आवश्यक वस्तु अधिनियम को लेकर भी चिंतित हैं। 



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