सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि डीजल के बजाए सीएनजी ट्रैक्टर के इस्तेमाल से किसान सालाना एक लाख रुपये बचा सकेंगे। सीएनजी ट्रैक्टर से 80 फीसदी वायु प्रदूषण कम होगा, वहीं नए उत्सर्जन मानक के तहत उनको चलाने पर प्रतिबंध नहीं लगेगा और 15 साल तक किसान ऐसे ट्रैक्टरों को चला सकेगे। विदित हो कि सरकार की कबाड़ नीति में 15 साल पुराने व्यवसायिक वाहनों को हटाने की योजना है।

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नितिन गडकरी ने यह बात शुक्रवार को डीजल से बायो-सीएनजी इंजन में परिवर्तित किए गए सीएनजी ट्रैक्टर लांच करने के कार्यक्रम में कही। उन्होंने ट्रैक्टर की तकनीकी में किए गए बदलाव की कीमत के बारे में कुछ नहीं बताया। गडकरी ने कहा कि शुरूआत में तकनीकी मंहगी होती है लेकिन बाद में काफी सस्ती हो जाती है। जिससे आम आदमी इसे अपना सकता है।

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सीएनजी ट्रैक्टर से किसान पैसे बचा सकेंगे इसके साथ ही गांव-कस्बों में डीजल से सीएनजी में बदलने की तकनीक संबंधी केंद्र खुलेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिलेगा। खेतीबाड़ी, गेहूं, धान व कृषि से आदि वेस्ट से बायो-सीएनजी बनाने की योजना है। सरकार हर साल पेट्रोलियम पदार्थ के निर्यात पर खर्च होने वाले आठ लाख करोड़ को कम करना चाहती है। यह वैकल्पिक ईधन को बढ़ावा देने से होगा। इसके तहत बायो-सीएनजी, इलेक्ट्रिकल, एथॉनोल, हाईड्रोजन आदि ईधन के उपयोग पर काम कर रही है।

अगले 10 साल में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंचेगा

योजना के मुताबिक प्रथम चरण में शहरों में नगर बसों, टैक्सी, कारों, स्कूटर-मोटरइसाकिल को वैकल्पिक ईधन पर लाया जाएगा। इसके बाद अंतरराज्यीय सार्वजनिक बस सेवा व ट्रकों को वैकल्पिक ईंधन पर बदला जाएगा। पेट्रोलियम मंत्री धर्मैद्र प्रधान ने कहा कि ईंधन खपत के मामले में चीन, अमेरिका के बाद भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। अगले 10 साल में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंच जाएगा। इसके लिए सड़क परिवहन मंत्रलाय के साथ मिलकर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने इस साल 20 हजार करोड़ की वैकल्पिक ईंधन खरीद की योजना बनाई है। पेट्रोल पंप की तर्ज पर वैकल्पिक ईंधन के पंप खोलने के लिए सरकार इजाजत देगी। सरकार नेशनल हाईड्रोजन मिशन पर काम कर रही है।



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