भारत ने शनिवार को जी20 कृषि बैठक में जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन और 2030 तक खाद्य की मांग में वृद्धि से जुड़ी चुनौतियों के बीच कृषि अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इतालवी प्रेजिडेंसी द्वारा आयोजित जी-20 की कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये कहा, ”कृषि अनुसंधान ने खाद्य सुरक्षा की समस्‍या से निपटने, किसानों व खेतिहरों की आय में सुधार करने तथा लोगों की आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनुसंधान खाद्य सुरक्षा के तीन पहलुओं- उपलब्धता, पहुंच और सामर्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
     
उन्होंने बैठक के सत्र ‘स्थिरता के पीछे एक प्रेरक शक्ति के रूप में अनुसंधान को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में कृषि अनुसंधान ने देश को खाद्यान्न आयातक से, निर्यातक के रूप में बदलने में प्रमुख भूमिका निभाई हैं। तोमर ने कहा, ”समेकित अनुसंधान के प्रयासों से बेहतर मृदा उत्पादकता, भंडारण के लिए जल प्रबंधन, विस्तार एवं दक्षता हेतु तकनीकों और पद्धतियों को विकसित किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि भारत सालाना 30.8 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ न केवल अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों को आपूर्ति भी कर रहा है। कृषि मंत्री ने कहा, ”2030-31 तक भारत की आबादी 150 करोड़ से ज्यादा होने की संभावना है, जिसके पोषण के लिए अनाज की मांग तब लगभग 35 करोड़ टन तक होने का अनुमान है। इसी तरह खाद्य तेलों, दूध व दूध से बने उत्पादों, मांस, अंडे, मछली, सब्जियों, फलों और चीनी की मांग काफी बढ़ जाएगी। इसके मुकाबले प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और जलवायु परिवर्तन की चुनौती भी है।
     
उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में जीनोमिक्स, डिजिटल कृषि, जलवायु स्मार्ट प्रौद्योगिकियों व पद्धतियों, कुशल जल उपयोग उपकरणों, उच्‍च उपज वाली किस्मों के विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।

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