संसद की तरफ से हाल में कृषि सुधार से जुड़े दो बिलों को पास किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने गुरुवार से राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है। राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का यह फैसला दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में महासचिवों और राज्य प्रभारियों के साथ हुई बैठक के दौरान किया गया।

कांग्रेस नेता ए.के. एंटनी ने बुधवार को बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “24 सितंबर से कांग्रेस सरकार को काले कानून वापस लेने के लिए कहते हुए ऑल-इंडिया में प्रदर्शन करेगी।” विपक्ष की तरफ से भारी विरोध के बावजूद राज्यसभा में दो बिल- कृषि सेवा पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता विधेयक तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 को पास कराया गया।

इस बिल को पहले ही लोकसभा से मंजूरी मिल चुकी है और अब ये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास है। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे इन बिलों को अपनी स्वीकृति न दें। वे चाहते हैं कि सरकार इन बिलों को वापस ले ले।

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इन बिलों के खिलाफ विभिन्न दलों के कई नेता किसानों के साथ देशभर की गलियों पर प्रदर्शन के लिए उतर चुके हैं। केन्द्र की तरफ से बिलों को वापस लेने की मांग को केन्द्र की तरफ न माने जाने के बाद विपक्षी दलों ने मंगलवार को संसद का बहिष्कार किया।

इससे पहले, बुधवार की शाम को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कृषि विधेयकों और ऊपरी सदन के आठ सांसदों के निलंबन के मुद्दों पर शाम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्ष की करीब 16 पार्टियों ने इन मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है।

इससे पहले फैसला हुआ था कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सदन में सदस्यों की संख्या के आधार पर पांच प्रमुख विपक्षी दलों … कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति और द्रमुक के पांच प्रतिनिधि राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के लिए जाएंगे।

बहरहाल, तृणमूल कांग्रेस ने आग्रह किया था कि उसकी जगह किसी छोटी पार्टी के प्रतिनिधि को भेजा जाए क्योंकि कृषि विधेयकों के खिलाफ लड़ाई मिलकर लड़ी गई है और यह प्रयास सदन में संख्या के आधार पर निर्भर नहीं करता है। न्यूज एजेंसी ‘भाषा’ को सूत्रों ने बताया कि विपक्षी दल इस बात पर एकमत थे कि वे इस मुलाकात से किसी पार्टी को अलग नहीं रखना चाहते, लेकिन कोरोना संकट से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है।

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