नए अमेरिकी प्रशासन ने बुधवार को भारत के शीर्ष नेतृत्व के साथ औपचारिक रूप से संपर्क शुरू किया। इसके तहत, रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने अपने समकक्षों राजनाथ सिंह और अजीत डोभाल के साथ इंडो-पैसिफिक में रक्षा सहयोग और स्थिरता पर चर्चा की। टेलीफोन के जरिए हुई पहली बातचीत में  दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक साथ काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, उन्होंने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

वहीं, विदेश मंत्रालय ने डोभाल और सुलिवन की बातचीत के बाद बताया कि भारत और अमेरिका ने कोविड-19 के बाद के दौर में सामूहिक रूप से चुनौतियों का सामना करने की जरूरतों पर चर्चा की। इसके अलावा, दोनों ही बातचीत के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आतंकवाद और स्थिरता जैसे प्रमुख मुद्दों पर बारीकी से काम करने के लिए भी सहमत हुए। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने इस बातचीत को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

बता दें कि पिछले सप्ताह जो बाइडन के अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद दोनों देशों के बीच टेलीफोन के जरिए हुई यह पहली उच्च स्तरीय बातचीत थी। माना जा रहा है कि विश्व के अन्य नेताओं से जो बाइडन की हो रही बातचीत के तहत वे जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत करेंगे। इससे पहले राजनाथ सिंह ने पहले अफ्रीकी-अमेरिकी रक्षा सचिव बनने पर ऑस्टिन को बधाई दी थी। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने नवंबर महीने में चुनाव जीतने के बाद जो बाइडन से बात की थी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में महामारी, जलवायु परिवर्तन और सहयोग सहित साझा प्राथमिकताओं और चिंताओं पर चर्चा की थी।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि सुलिवन के साथ बातचीत में डोभाल ने कहा कि खुले और समावेशी विश्व व्यवस्था में विश्वास के साथ दो अग्रणी लोकतंत्र वाले देश- भारत और अमेरिका क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर निकटता से काम करने के लिए तैयार हैं। इन मुद्दों में आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता शामिल है। वहीं, सुलिवन ने कहा कि अमेरिका द्विपक्षीय एजेंडे और आम वैश्विक चुनौतियों पर एक साथ काम करने के लिए उत्सुक है।

वहीं, राजनाथ सिंह ने कहा कि बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को प्रगाढ़ करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया गया। हमने अपनी सामरिक भागीदारी को मजबूत बनाने के वास्ते पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके अलावा, इजरायल के थिंक टैंक- इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के वार्षिक सम्मेलन को बुधवार को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि एक पूर्व-प्रतिष्ठित शक्ति के रूप में अमेरिका को दुनिया की चुनौतियों से निपटना होगा और इसके लिए मजबूत भागीदारी की आवश्यकता होगी। जयशंकर ने दुनिया भर में होने वाले बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि कहीं भी बदलाव एशिया की तुलना में अधिक तेज गति से नहीं लाए गए हैं।





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