हाइलाइट्स:

  • कॉर्बेट नेशनल पार्क और राजाजी नेशनल पार्क की सीमा के बीच स्थित क्रिटिकल वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का मामला
  • बिजनौर के नजीबाबाद वन प्रभाग का हिस्सा है क्रिटिकल वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
  • इस कॉरिडोर के बीच बाघों और हाथियों सहित जानवरों के लगातार गुजरने का रेकॉर्ड मौजूद

मेरठ
यूपी में क्रिटिकल वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के तहत आने वाले जंगल और नदियों की जमीन पर अतिक्रमण और गड़बड़झाला कर जमीन हड़पने का मामला गरमा गया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने यूपी सरकार से उस शिकायत पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें कहा गया है कि लगभग 12,000 एकड़ वन भूमि के अभिलेखों में कूट रचित एंट्री कर घोटाला किया गया है। बता दें कि क्रिटिकल वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बिजनौर के नजीबाबाद वन प्रभाग का हिस्सा है। उत्तराखंड में कॉर्बेट नेशनल पार्क और राजाजी नेशनल पार्क की सीमाएं हैं। इस कॉरिडोर के बीच बाघों और हाथियों सहित जानवरों के लगातार गुजरने का रेकॉर्ड है।

एनटीसीए ने यह कदम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वकील गौरव बंसल की एक शिकायत के बाद उठाया है, जिसमें यूपी के जंगलों में जमीन हड़पने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में बंसल ने कहा कि क्रिटिकल वाइल्डलाइफ कॉरिडोर इस क्षेत्र में बाघों सहित दूसरे जानवरों के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता प्रदान करता, इसके बावजूद अधिकारी उस पर अतिक्रमण होने से रोकने में विफल रहे हैं। यूपी और बिजनौर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) के मुख्य वन्यजीव वार्डन को लिखे गए पत्र में एनटीसीए ने अधिकारियों को शिकायत पर “तथ्यात्मक स्थिति प्रस्तुत करने और उचित कार्रवाई करने” का निर्देश दिया है।

एनटीसीए से रिपोर्ट को लेकर पत्र मिला
नजीबाबाद (बिजनौर) के प्रभागीय वनाधिकारी मनोज शुक्ला ने टीओआई को पुष्टि की कि उन्हें इस संबंध में एनटीसीए से एक पत्र मिला है। उन्होंने बताया कि एनटीसीए में शिकायत दर्ज की गई है। इस पर उनके मार्फत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है जिसमें गाठा संख्या से लेकर आदि जानकारी जुटाई जा रही है। कहा कि चूंकि सभी राजस्व भूमि रिकॉर्ड जिला प्रशासन के पास हैं, इसलिए हमने उनसे इस मामले की पूरी जांच करने को कहा है।

अपराध का ग्राफ शेयर कर प्रियंका का योगी सरकार पर निशाना, यूपी की टॉप-5 खबरें

पंजाब, असम, राजस्थान और यूपी के व्यवसायी हैं कब्जा करने वाले
नगीना तहसील के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के कार्यालय में तैनात एक स्टेनोग्राफर किशन चंद के अनुसार, गंगा की सहायक नदी खोह के साथ-साथ 12 गांवों के आसपास की वन भूमि जमीन को पिछले साल हड़पने का काम किया था। इस जमीन को रिएल एस्‍टेट वालों को ट्रांसफर कर दिया गया है, इसमें ज्यादातर पंजाब, असम, राजस्थान और यूपी के रहने वाले हैं।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here