Edited By Dil Prakash | पीटीआई | Updated:

फाइल फोटो

नई दिल्ली

देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की आशंका है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मेडिकल सुविधाएं बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को साथ में जोड़ने को कहा है। साथ ही केंद्र ने राज्यों को किफायती दरों पर क्रिटिकल केयर की सुविधा मुहैया कराने को कहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कई ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं जिनसे पता चलता है कि देश में हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी हो रही है। इनमें कोविड-19 के मरीजों के लिए अस्पतालों में आईसीयू बेड, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड शामिल हैं। साथ ही कई अस्पतालों के कोविड-19 के इलाज के लिए ज्यादा फीस वसूलने की भी खबरें हैं। इस स्थिति को देखते हुए मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आने वाले दिनों में मेडिकल सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए निजी अस्पतालों के साथ मिलकर काम करने को कहा है। साथ ही उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि कोई भी अस्पताल इलाज के लिए मरीजों से तय फीस से अधिक न वसूले।

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रेट फिक्स करें राज्य

कुछ राज्य पहले ही इसमें पहल कर चुके हैं और उन्होंने निजी अस्पतालों के साथ करार किया है ताकि मरीजों को किफायती दरों पर इलाज मुहैया कराया जा सके। मंत्रालय ने कहा कि पीएमजेएवाई और सीजीएचएस पैकेज में रेट तय किए गए हैं। मरीजों को किफायती दरों पर त्वरित और अच्छा इलाज मुहैया कराने के लिए राज्यों को निजी अस्पतालों से बात करनी चाहिए और इलाज का रेट फिक्स करना चाहिए। रेट फिक्स होने के बाद इसका व्यापक प्रचार होना चाहिए ताकि मरीज और अस्पताल को इसकी पूरी जानकारी हो।

गौरतलब है कि देश में कोरोना के मामले 3 लाख को पार कर चुके हैं। कई राज्यों में यह भयावह स्थिति में पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जुलाई-अगस्त में पीक पर पहुंच सकता है। केवल दिल्ली में ही 31 जुलाई तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 5 लाख से ऊपर पहुंचने की आशंका है।



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