नई दिल्लीः कोरोना वायरस के एक वेरिएंट को तीन हफ्ते पहले हम ‘इंडियन’ वेरिएंट कह रहे थे. फिर नया नाम आया ‘डेल्टा’ और अब एक डरावना नाम ‘डेल्टा-प्लस’  है. वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत की दूसरी बड़ी कोविड लहर का कारण बने डेल्टा वेरिएंट में एक और म्युटेशन हुआ है जो वैक्सीन और कोविड इम्युनिटी को चकमा देने में इसकी मदद कर सकता है.

लेकिन डरावने म्यूटेशन हमेशा अधिक चिंताजनक वायरस में तब्दील नहीं होते हैं. उदाहरण के लिए पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया वेरिएंट ‘बीटा’, ये सभी टीकों की प्रभावकारिता को कम करता है लेकिन अल्फा (‘यूके वेरिएंट’) की तरह दुनिया में नहीं फैल पाया. दरअसल B.1.617.1 वेरिएंट में पहले से ही वैक्सीन से बचने के लिए ‘484Q’ म्यूटेशन है, फिर भी डेल्टा (B.1.617.2) इसके बिना एक बेहतर स्प्रेडर बन गया है.

सुपर स्प्रेडर वेरिएंट हैं डेल्टा 
डेल्टा भारत का प्रमुख स्ट्रेन है. ब्रिटेन में 91% नए मामले इसके कारण आ रह हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने पिछले शुक्रवार को कहा कि अमेरिका में हर दो हफ्ते में इसके मामले दोगुने हो रहे हैं और यह पूरी दुनिया में दस्तक देने जा रहा है.

इंपीरियल कॉलेज लंदन के एपिडोलॉजिस्ट, नील फर्ग्यूसन न्यूयॉर्क मैगजीन को बतया कि डेल्टा अब तक का सबसे बेस्ट स्प्रेडर है. अल्फा भी एक सुपर-स्प्रेडर था, लेकिन डेल्टा इससे 60% अधिक ट्रांसमिसिबल हो सकता है. पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के अनुसार, घरों के भीतर डेल्टा अल्फा की तुलना में कम से कम 60% अधिक ट्रांसमिसिबल है.

वैक्सीन की दो डोज इस वेरिएंट पर प्रभावी
डेल्टा की हाई ट्रांसमिसिबलिटी 452R और 478K  म्युटेशन के कारण हैं. दोनों इसे मानव कोशिकाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद करते हैं और संभवतः प्रतिरक्षा को चकमा देते हैं. जबकि दो डोज अभी भी इसके खिलाफ अच्छी तरह से काम करते हैं, एक डोज से सुरक्षा कम हो गई है. यूके के डेटा से पता चलता है कि एक शॉट अल्फा के खिलाफ 51% की तुलना में डेल्टा के खिलाफ 33% सुरक्षा देता है. इसलिए आंशिक रूप से टीका लगाए गए लोगों को अब संक्रमण का अधिक खतरा है.

अस्पताल में भर्ती होने की रिस्क 2.6 गुना ज्यादा 
डेल्टा में अल्फा की तुलना में गंभीर बीमारी होने की संभावना अधिक होती है.इंग्लैंड में द गार्जियन का कहना है कि  इससे अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 2.6 गुना अधिक है. उदाहरण के लिए, अल्फा से एक व्यक्ति 4-5 अन्य को संक्रमित कर सकता है. डेल्टा के साथ यह बढ़कर 5-8 हो गया है. दो संक्रमित लोगों से शुरू करें तो अल्फा से संक्रमण के 10 राउंड के बाद कुल मामलों की संख्या 20 लाख से 2 करोड़ के बीच हो सकती है. वहीं डेल्टा से यह रेंट 2 करोड़ से 2 अरब तक हो सकती है.

एक डोज के बाद संक्रमित होने पर भर्ती होने की संभावना नहीं 
हालांकि, अच्छी खबर यह है कि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीनेशन अभी भी अत्यधिक प्रभावी है. हालांकि एक डोज के बाद संक्रमित होने के चांस अब अधिक हैं, फिर भी अस्पताल में भर्ती होने की संभावना नहीं है. बीबीसी के अनुसार, टीके की एक डोज किसी व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना को कम कर देती है और अस्पताल में इलाज की आवश्यकता लगभग 75% तक कम हो जाती है. दो डोज के बाद अस्पताल में भर्ती होने की रिस्क 90% कम हो जाती है.  

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