1 फरवरी को देश का आम बजट 2021-22 पेश किया जाएगा। कोरोना के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था का हाल बहुत बेहतर नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय कई स्तर पर जूझ रही है। ऐसे में लोग इस उम्मीद में बैठे हैं कि सरकार इस नए आम बजट के जरिए लोगों को विशेष मदद करेगी। वहीं सरकार विभिन्न योजनाओं पर खर्च करने के लिए पैसा की व्यवस्था में लगी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार बजट में कोरोना सेस ला सकती है।
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क्या होता है सेस चार्ज
सेस चार्ज किसी खास उद्देश्य के लिए लोगों से लिया जाता है। इस सेस चार्ज का पैसा किसी और काम में सरकार नहीं लगा सकती। वर्तमान समय में सरकार 4 प्रतिशत सेस चार्ज कर रही है। यह सेस चार्ज हेल्थ और एजुकेशन के लिए लिया जा रहा है। 2018 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट के दौरान इस सेस चार्ज को लोगों के सामने रखा था। तब यह 3 प्रतिशत था, 2 प्रतिशत प्राइमरी शिक्षा के लिए जबकि 1 प्रतिशत सीनीयर सेकेंड्री के लिए।
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कैसे वसूला जाता है सेस चार्ज
सरकार सेस चार्ज वसूलने का बहुत ही सरल तरीका अपनाती है। टैक्स छूट मिलने के बाद जितने पैसे का आपको टैक्स देना है उसमें 4 प्रतिशत सेस चार्ज जोड़ दिया जाता है। उदारहण के तौर पर किसी को 50 हजार रुपये का टैक्स भरना था सभी छूट मिलने के बाद, तो वह व्यक्ति 50,000 का 4 प्रतिशत यानि 2000 रुपये जोड़कर 52,000 रुपये का टैक्स भरेगा। अगर इस पर एक प्रतिशत और सेस चार्ज बढ़ता है तो यही राशि 52, 500 हो जाएगी।







