प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहा कि कोसी रेल महासेतु मिथिला और कोसी क्षेत्र के लिये वरदान साबित होगा। इस रेलखंड के शुरू होने से क्षेत्र में व्यापार, उद्योग और रोजगार बढ़ेगा। पीएम मोदी शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बिहार की कई रेल परियोजनाओं के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। 

सुपौल-सरायगढ़-राघोपुर और सुपौल-आसनपुर कुपहा (कोसी रेल ब्रिज) पर डेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद पीएम ने कहा कि मिथिला और कोसी क्षेत्र को जोड़ने वाला रेल महासेतु बिहारवासियों की सेवा में सौंपा जा रहा है। साढ़े आठ दशक पहले भूकंप की भीषण आपदा ने मिथिला और कोसी क्षेत्र को अलग-थलग कर दिया था। आज यह संयोग है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच इन दोनों अंचलों को आपस में जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके आखिरी चरण के काम में दूसरे राज्यों से आए प्रवासियों ने भी अपना योगदान दिया।

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पीएम ने कहा कि यह महासेतु और यह प्रोजेक्ट श्रद्धेय अटल जी और नीतीश बाबू का ड्रीम प्रोजेक्ट था। जब 2003 में नीतीश रेलमंत्री थे और अटल जी प्रधानमंत्री, तब नई कोसी रेल लाइन परियोजना की कल्पना की गई थी। इसका उद्देश्य यही था कि कोसी और मिथिला के लोगों की दिक्कतों को दूर किया जाए। इसी सोच के साथ 6 जून 2003 में अटल जी ने इस रेल परियोजना का शिलान्यास किया था। लेकिन अगले साल उनकी सरकार चली गई और उसके बाद कोसी में इस रेल परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई। 

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उन्होंने बिना किसी का नाम लिये कहा कि अगर मिथिलांचल और बिहार के लोगों को हो रही दिक्कतों की चिंता रहती तो इस रेल लाइन परियोजना पर तेजी से काम हुआ होता। रेल मंत्रालय किसके पास था, किसकी सरकार थी, इस विषय पर हम जाना नहीं चाहते। सच्चाई यही है कि जिस रफ्तार से पहले काम हो रहा था अगर उसी रफ्तार से 2004 के बाद भी काम हुआ होता तो आजकल का यह दिन कब आता, नहीं पता। कितने साल लग जाते, कितने दशक बीत जाते और कई पीढ़ियां गुजर जाती। लेकिन दृढ निश्चय हो, नीतीश जी जैसा सहयोगी हो तो क्या कुछ संभव नहीं है? मिट्टी रोकने की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सुपौल-आसनपुर कुपहा रेलखंड का काम पूरा किया गया। साल 2017 में जो भीषण बाढ़ आई थी, उसमें इस निर्माणाधीन रेलखंड को हुए नुकसान की भरपाई भी इस दौरान की गई।

सफर-समय और पैसे की होगी बचत
पीएम मोदी ने कहा कि इस रेलखंड पर ट्रेन सेवा शुरू होने से सुपौल, अररिया और सहरसा के लोगों को फायदा होगा। यही नहीं इससे नॉर्थ ईस्ट के साथियों के लिए भी एक वैकल्पिक रेलमार्ग तैयार हो जाएगा। कोसी और मिथिला के लिए यह कोसी महासेतु सुविधा का साधन तो है ही, इस पूरे क्षेत्र में व्यापार, कारोबार, उद्योग और रोजगार को भी बढ़ावा देने वाला है। कहा कि पहले निर्मली से सरायगढ़ तक का रेलसफर करीब-करीब 300 किमी का था। लोगों को दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया, मानसी, सहरसा और सुपौल होते हुए जाना पड़ता था। अब 300 किलोमीटर की यात्रा 22 किलोमीटर में सिमट जाएगी। आठ घंटे की रेल यात्रा आधे घंटे में पूरी हो जाएगी। इससे सफर, समय और धन तीनों की बचत होगी। कोसी और मिथिला के लोगों की पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत की रेल कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी।



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