कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान कर्फ्यू पास दिखाने की मांग करने पर निहंग सिख ने एक पुलिस अधिकारी का हाथ काट डाला था। एक बार फिर से निहंग सिख सुर्ख़ियों में हैं। अबकी निहंग सिख सिंघु बॉर्डर पर एक हत्या को लेकर चर्चा में हैं। कुछ लोगों ने कथित तौर पर आरोप लगाए हैं कि जिस शख्स की हत्या की गई उसने सिखों के पवित्र ग्रंथ का अपमान का अपमान करने की कोशिश की थी। आइए जानते हैं निहंग सिख कौन होते हैं।

निहंग सिख योद्धा होते हैं। ये नीले कपड़े पहनते हैं और तलवार और भाले जैसे पुराने हथियार रखते हैं। इतिहासकार बलवंत सिंह बताते हैं कि फारसी भाषा में निहंग शब्द का अर्थ मगरमच्छ, तलवार और कलम के अर्थ में होता है। लेकिन निहंग सिख संस्कृत शब्द निशंक के ज्यादा नजदीक होते हैं। इसका अर्थ जिसे कोई शंका न हो, कोई डर न हो, मोह न हो आदि से है। निहंग शब्द का इस्तेमाल श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में भी हुआ है। यहां इस शब्द का अर्थ निडर और बेसब्र बताया गया है।

ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्नल जेम्स स्किनर के एक लेख के मुताबिक खालसा सिखों को दो भागों में बांटा गया है। पहले वो जो नीले रंग की पोशाक पहनते हैं जो गुरु गोबिंद सिंह युद्ध के समय पहनते थे। और दूसरे वो जो किसी भी रंग के पोशाक पहनते हैं। लेकिन दोनों ही ग्रुप सैनिक धर्म का निर्वाह करते हैं और बहादुर होते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि निहंग सिख खालसा की आचार संहिता का सख्ती से पालन करते हैं। ये भगवा निशान साहिब के बजाए नीला निशान साहिब फहराते हैं। 

पहले सिख शासन के पतन के बाद जब मुगलों और अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह दुर्रानी ने सिखों को मारना शुरू किया तो सिखों की रक्षा करने में निहंगों ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। सिखों के धार्मिक मामलों पर निहंग सिखों का ही नियंत्रण रहा है। 

हाल के दिनों में निहंग सिख अपने हिंसक वारदातों को लेकर मीडिया में जगह बना रहे हैं। डेढ़ साल पहले निहंग सिख ने एक पुलिस अफसर का हाथ काट डाला था। इसी साल जुलाई में निहंगों ने लुधियाना में पूर्व पीएम राजीव गांधी कि प्रतिमा को आग लगा दी थी। और अब सिंघु बॉर्डर पर निहंगों ने कथित तौर पर एक शख्स की हत्या कर दी है।

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