कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चिंताएं प्रकट की जा रही हैं। लेकिन भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान (आईआईटी) के विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर छोटी हो सकती है। विशेषज्ञ तीसरी लहर की मॉडलिंग कर रहे हैं और अगले सप्ताह इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी करेंगे। आईआईटी के प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने ट्वीट कर कहा कि ब्रिटेन में कोरोना की नई लहर को लेकर चिंताएं जाहिर की जा रही थीं, लेकिन संक्रमण का जो रुझान है, उससे साफ है कि यह कोई बड़ा आकार लेती हुई अभी तक नहीं दिखी है। मॉडल संकेत कर रहे हैं कि आगे भी इसके ज्यादा बढ़ने के रुझान नहीं हैं।
उन्होंने हिन्दुस्तान से कहा कि हालांकि उनके सूत्र मॉडल के नतीजों को अभी विश्लेषण कर अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, लेकिन आरंभिक संकेतों से साफ है कि भारत में भी तीसरी लहर ज्यादा बड़ी नहीं होगी। यह पहली और दूसरी लहर की तुलना में बहुत कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि लहर कब आएगी और वास्तव में इसका प्रभाव कितना रहेगा, इसका विश्लेषण किया जा रहा है तथा अगले सप्ताह इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी करेंगे।
Starting a new thread on countries. First UK since there is a lot of talk about another wave there. It does not appear to be a major one. The current phase is not fully stable, so the projection may change a bit, but not substantially. pic.twitter.com/TvGxFJNzZy
— Manindra Agrawal (@agrawalmanindra) June 7, 2021
अग्रवाल ने कहा कि ब्रिटेन में तीन लहरें पहले आ चुकी हैं। चौथी लहर नहीं आने की एक ही वजह टीकाकरण हो सकती है। भारत में भी टीकाकरण में तेजी आ रही है, इसलिए इसका असर स्पष्ट तौर पर आंकड़ों पर दिखेगा। देश में कोरोना संक्रमण में तेजी से कमी आ रही है। लेकिन इसके पूर्व के स्तर पर आने में अभी कम से कम एक महीना और लग सकता है। बता दें कि फरवरी में कोरोना के मामले घटकर नौ हजार के करीब रह गए थे।
नए संक्रमण में कमी: इस बीच लगातार दूसरे दिन में कोरोना के नए संक्रमण एक लाख से नीचे दर्ज किए गए हैं। बुधवार को कुल 92596 नए मामले आए हैं। हालांकि एक दिन पहले की तुलना में थोड़े मामले बढ़े हैं। लेकिन मौतों का आंकड़ा अभी भी ऊंचा बना हुआ है। पिछले चौबीस घंटों में 2219 मौतें दर्ज की गई हैं जो चिंताजनक हैं। करीब-करीब सभी राज्यों में मौतें दर्ज की गई हैं।







