केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को 670 करोड़ रुपये की पूंजी उपलब्ध कराई है। आरआरबी के पूंजी आधार को मजबूत करने तथा इस मुश्किल समय में कृषि वित्त में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के मद्देनजर केंद्र की ओर से यह कदम उठाया गया है। सूत्रों ने कहा कि 43 आरआरबी में से एक-तिहाई घाटे में हैं। इनमें से ज्यादाकर पूर्वोत्तर तथा पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक हैं। सूत्रों ने कहा कि इन आरआरबी को नौ फीसद की नियामकीय पूंजी की अनिवार्यता को पूरा करने के लिए मदद की जरूरत थी। 

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आरआरबी के पुन:पूंजीकरण की मौजूदा योजना के तहत इन बैंकों को केंद्र, संबंधित राज्य सरकारों तथा प्रायोजक बैंकों से 50:15:35 के अनुपात में पूंजीगत समर्थन उपलब्ध कराया जाता है। इसकी मदद से ये बैंक नौ फीसद के पूंजी जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) को पूरा कर पाते हैं। 

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सूत्रों ने बताया कि इसी अनुपात में प्रायोजक बैंकों तथा कुछ राज्यों द्वारा भी आरआरबी के लिए कोष जारी किया गया है। इससे अब इन कमजोर आरआरबी का सीआरएआर बढ़कर नौ फीसद के स्तर पर पहुंच गया है। सूत्रों ने बताया कि इससे इन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की 31 मार्च, 2021 तक की पूंजीगत जरूरत पूरी हो गई है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च, 2020 को समाप्त वित्त वर्ष में आरआरबी को सामूहिक रूप से 2,206 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में आरआरबी को 652 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। 

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