भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार को कहा कि आंदोलनकारी किसान लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं और मांगें पूरी होने पर ही पीछे हटेंगे। हालांकि, इस बीच टिकैत ने कहा कि सरकार कोरोना महामारी की आड़ में उन स्थानों पर प्रतिबंध लगा सकती है, जहां बड़ी संख्या में किसान बैठे हैं, लेकिन यह हमें डिगा नहीं पाएगा।
टिकैत ने करनाल जिले के असंध में एक महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि लड़ाई केवल किसानों की नहीं है, बल्कि यह गरीब, छोटे व्यापारियों के लिए भी है। उन्होंने कहा कि किसान लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं और यह आंदोलन लंबा चलेगा। हमने नवंबर-दिसंबर तक की तैयारियां की हैं। टिकैत ने दोहराया कि केंद्र को कृषि कानून वापस लेने चाहिए तथा एमएसपी पर कानूनी गारंटी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानून किसानों को ही नहीं, बल्कि दूसरे तबकों को भी प्रतिकूल तरह से प्रभावित करेंगे।
इस दौरान अपने दिवंगत पिता महेंद्र सिंह टिकैत का जिक्र करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि टिकैत साहब कहा करते थे कि जब हरियाणा आंदोलन के समर्थन में खड़ा होता है तो सरकार कांप जाती है। टिकैत ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता तब तक किसान किसान आंदोलन जारी रहेगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानून की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि जब एमएसपी पर कानून बनेगा तभी किसानों का भला होगा।
भारत बंद : रेल, सड़क परिवहन के प्रभावित होने की संभावना
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 मार्च को भारत बंद का आह्वान किया है। 26 मार्च को केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को चार महीने पूरे हो रहे हैं। भारत बंद के दौरान देश के कई हिस्सों में शुक्रवार को रेल और सड़क परिवहन के प्रभावित होने की संभावना है तथा बाजार भी बंद रह सकते हैं। हालांकि पांच चुनावी राज्यों में यह बंद नहीं होगा। संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, देशभर में राष्ट्रव्यापी बंद 26 मार्च को सुबह छह बजे से शुरू होगा और शाम छह बजे तक चलेगा।
टिकैत का केंद्र पर हमला, बोले- ये लुटेरों की सरकार है,इनको जाना पड़ेगा
गौरतलब है कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ में दिल्ली की सीमाओं पर लगातार चार महीने से किसानों का हल्लाबोल जारी है। कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसान इस मुद्दे पर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं। किसानों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें मानने की अपील की है। वहीं सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन संशोधन संभव है।
बता दें कि किसान हाल ही बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों – द प्रोड्यूसर्स ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) एक्ट, 2020, द फार्मर्स ( एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेज एक्ट, 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (एमेंडमेंट) एक्ट, 2020 का विरोध कर रहे हैं। केन्द्र सरकार सितम्बर में पारित किए तीन नए कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे।







