पर्यावरण अनुकुल रिकवरी पैकेज से भारत कोरोना संकट के अर्थव्यवस्था पर प्रभावों को 2030 तक पूरी तरह से खत्म कर सकता है। साथ ही जीडीपी में स्थाई बढ़ोत्तरी का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है। क्रैंब्रिज विश्वविद्यालय के कार्पोरेट लीडर्स ग्रुप एवं दो अन्य संस्थानों की अध्ययन अध्ययन रिपोर्ट में यह नतीजा निकाला गया है।

कैंब्रिज इकोनोमेट्रिक्स, वी मीन बिज़नेस और कॉर्पोरेट लीडर्स ग्रुप की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य रिकवरी पैकेज जहां कोरोना से पहले की स्थिति को वापस लाने की बात करते हैं, वहीं ग्रीन रिकवरी पैकेज हमेशा के लिए सकारात्मक बदलाव लाते हैं। ये जीडीपी और रोजगार वृद्धि दोनों में कारगर हैं। आर्थिक रिकवरी के लिए रिपोर्ट में दो रास्ते बताये गए हैं।

पहला है टैक्स में कटौती कर उपभोक्ता को अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित करना और दूसरा है टैक्स कटौती के साथ पांच पर्यावरण अनुकूल कदम। यह पांच कदम हैं ऊर्जा दक्षता, बिजली की ग्रेड में सुधार जैसे सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना, बैट्री वाहनों को प्रोत्साहन, पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के निस्तारण की स्कीम और पौधारोपण का वृहद कार्यक्रम।

रिपोर्ट के अनुसार ग्रीन रिकवरी कदम न सिर्फ़ लम्बे समय में फायदा देते हैं, बल्कि उनके सकारात्मक असर तत्काल भी देखने को मिलेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ग्रीन रिकवरी पैकेज का जीडीपी को बढ़ाने में 79 फीसदी, रोजगार में 64 फीसदी का योगदान होगा। इसी प्रकार बृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम जीडीपी में दस फीसदी और रोजगार में 27 फीसदी का योगदान देंगे।

रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए द एनर्जी एंड रिसौर्सज इंस्टीट्यूट (टेरी) के महानिदेशक डा. अजय माथुर ने कहा कि निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि ऊर्जा के विकास में तेजी लाने वाली हरित वित्त समर्थक नीतियां भारत के विकास के लिए अच्छी हैं। इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और पुनर्वितरण का समर्थन स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। भारत सरकार पहले ही कदम उठा रही है।



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here