Edited By Ruchir Shukla | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

जमशेदपुर

कहते हैं अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी बाधा बीच में नहीं आ सकती। ऐसा ही कुछ झारखंड के जमशेदपुर में देखने को मिला। जहां एक दर्जी और घरेलू नौकरानी की बेटी नंदिता (Nandita Tops Jharkhand Board Exams) ने न केवल झारखंड बोर्ड 12वीं की परीक्षा में अच्छे नंबर हासिल किए बल्कि टॉप भी किया है। उसने ये कामयाबी अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से हासिल की। 10वीं के बाद नंदिता के माता-पिता ने आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे पढ़ाने में असमर्थतता जताई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने बेटी की लगन को देखते हुए अपनी रजामंदी दे दी। जमशेदपुर की इस बेटी ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर और खुद से मेहनत करके 12वीं की परीक्षा में सफलता हासिल की।

जमशेदपुर की नंदिता का कमाल

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की कक्षा 12वीं के नतीजे शुक्रवार को घोषित किए गए। जिसमें इंटरमीडिएट में आर्ट्स स्ट्रीम से जमशेदपुर की नंदिता टॉपर बनी हैं। जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज (JWC) की छात्रा नंदिता ने 500 में से 419 अंक हासिल करके ना केवल टॉपर बनीं, बल्कि अपने माता-पिता का भी नाम रौशन कर दिया। टीओआई से बात करते हुए नंदिता ने अपने रिजल्ट को लेकर बताया कि मैं एक अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रही था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं स्टेट टॉपर बनूंगी।

अपनी मेहनत से 12वीं में बनीं टॉपर

पिता राजेश हरिपाल और मां रश्मि अपनी खराब आर्थिक स्थिति की वजह से 10वीं के बाद नंदिता को आगे नहीं पढ़ाना चाहते थे। उनके कुल तीन बच्चे हैं, जिनमें 16 वर्षीय नंदिता सबसे बड़ी हैं। माता-पिता की स्थिति ऐसी नहीं थी कि मैट्रिक के बाद वो नंदिता को आगे पढ़ा सकें, क्योंकि वो उसकी स्कूल की फीस का खर्च नहीं उठा सकते थे। हालांकि, उन्होंने नंदिता को आगे की पढ़ाई की रजामंदी उस समय दे दी जब खुद नंदिता ने इसको लेकर अपनी इच्छा जताई और अपने खर्च और फीस के लिए प्राइवेट ट्यूशन लेना शुरू किया।

आईएएस बनने का है सपना

कड़ी मेहनत और बिना किसी प्राइवेट ट्यूशन के नंदिता ने स्कूल की पढ़ाई और खुद के अध्ययन से बोर्ड की परीक्षा में शानदार अंक हासिल किए। नंदिता को हिंदी में 90, भूगोल में 88, इतिहास में 85, अंग्रेजी में 82 और राजनीति विज्ञान में 74 अंक आए। नंदिता ने बताया कि मैंने ट्यूशन कक्षाओं से जो पैसे कमाए, उससे अपने स्कूल की फीस का भुगतान किया। मेरी कोई और रुचि नहीं है, लेकिन मैं अपनी शिक्षा को जारी रखूंगी, चाहे कुछ भी हो जाए। नंदिता ने बताया कि उनका उद्देश्य मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन का है, और आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं।

‘मैं सौभाग्यशाली, माता-पिता ने दी पढ़ाई की छूट’

जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल शुक्ला महंती ने शनिवार को नंदिता के घर जाकर उन्हें कुछ पैसे, एक चांदी का सिक्का और एक हाथ की घड़ी देकर सम्मानित किया। नंदिता ने बताया कि कॉलेज ने वादा किया है कि मॉस कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन के दौरान उनसे कोई फीस नहीं ली जाएगी। हॉस्टल फीस में भी छूट दी गई है। नंदिता ने कहा कि मैं बेहद सौभाग्यशाली हूं कि मेरे माता पिता ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए छूट दी। साथ ही कॉलेज से भी मुझे सपोर्ट मिला इसके लिए भी मैं आभारी हूं।



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