उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से आस-पास के इलाकों में काफी तबाही हुई है। इस आपदा में तपोवन-रैणी क्षेत्र में स्थित ऊर्जा परियोजना में काम करने वाले करीब 100-150 कर्मी के लापता हैं। ग्लेशियर टूटने के चलते अलकनंदा और धौली गंगा उफान पर हैं। ऋषिगंगा प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान रविवार देर रात नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण रोकना पड़ा है। करीब ढाई सौ मीटर इस सुरंग में अब भी 30 से अधिक लोगों के फंसे होने की संभावना है।
कुमांऊ दौरा स्थगित कर, रैणी गांव पहुंचे डीजीपी अशोक कुमार ने रविवार देर रात बचाव अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि प्रोजेक्ट की छोटी सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के बाद करीब ढाई सौ मीटर दूसरी लंबी सुरंग में तलाशी अभियान शुरू किया गया। लेकिन रात के समय नदी का जल स्तर बढ़ने से सुरंग में काम करना मुश्किल हो गया है। इसलिए बचाव अभियान सुबह तक के लिए रोक दिया गया है। उन्होंने बताया सोमवार को सुबह सवेरे नए सिरे से प्रयास किए जाएंगे। इस सुरंग में कई लोगों के फंसे होने की संभावना है।
डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि ऋषिगंगा प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात एक हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल भी घटना के बाद से ही लापता हैं। आश्वासन दिया है कि राहत व बचाव कार्यों में किसी भी तरह की कोई ढिलाई नहीं होगी। हादसे के बाद स्थानीय पुलिस ने भी सबसे पहले बवाव और राहत अभियान शुरू किया। इसके बाद हालात को देखते हुए सेना के 100, आईटीबीपी के 315, एनडीआरएफ के 250 जवानों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया। इधर, गाजियाबाद से भी एनडीआरएफ के 100 जवान, एयरफोर्स के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच गए हैं।
#Uttarakhand DGP @Ashokkumarips said rescue work at the NTPC’s 900-metre long #TapovanTunnel had to be halted due to rise in water level.@ndmaindia @ntpclimited @uttarakhandcops @PIB_India
— PIB in Uttarakhand (@PIBDehradun) February 7, 2021
जिन्हें सोमवार को चमोली रवाना किया जाएगा। जबकि एनडीआरएफ के साठ जवानों की एक टुकड़ी पहले ही सड़क मार्ग से चमोली रवाना हो चुकी है।एसडीआरएफ के मुताबिक ग्लेशियर टूटने की घटना रविवार सुबह 10: 50 बजे जोशीमठ से करीब 15 किमी की दूरी पर स्थित रेणी गाँव के करीब हुई। ग्लेशियर के टूटने से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हो गया। जिस पर एसडीआरएफ की पांच टीमों को तत्काल जोशीमठ रवाना किया गया। साथ ही श्रीनगर, ऋषिकेश, जोशीमठ में टीमों को अलर्ट स्थिति में रखा गया। हादसे की वजह से रैणी गांव के पास बीआरओ का लगभग 90 मीटर लंबा पुल भी आपदा में बह गया।
ऋषिगंगा पर स्थित यह पुल सीमावर्ती क्षेत्र मलारी को जोड़ता है, लेकिन इसके टूटने से फिलहाल यह क्षेत्र सड़क संपर्क मार्ग से अलग हो गया है। इसके अलावा चार अन्य झूला पुल भी बह गए। इसकी वजह से आसपास के गांवों का संपर्क भी टूट गया है। आपदा की वजह से ऋषिगंगा व धौलीगंगा के 17 गांवों का जिले से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इनमें छह गांव ऐसे भी हैं जो सर्दियों में बर्फबारी के चलते माइग्रेट कर लेते हैं। फिलहाल 11 गांवों के ग्रामीणों के सामने मुसीबतें बढ़ गई हैं।







