लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के नेता चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के पार्टी अध्यक्ष के चुनाव को खारिज करते हुए कहा कि पटना में आयोजित बैठक असंवैधानिक थी और इसमें राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्यों की न्यूनतम उपस्थिति भी नहीं थी। चिराग ने कहा कि लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा किया जाता है जिसमें लगभग 75 सदस्य होते हैं। जबकि गुरुवार को पटना में हुई लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में केवल 9 सदस्य उपस्थित थे। निलंबित सदस्यों ने मेरे चाचा को अध्यक्ष चुना है, जो अवैध है।

चिराग ने कहा कि मेरे पास पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों के हलफनामे हैं, जिन्होंने मेरे नेतृत्व पर भरोसा जताया है। मैंने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि ये 5 सांसद अब लोजपा के नहीं, बल्कि निर्दलीय सांसद हैं। मुझे विश्वास है कि लोजपा संविधान के मद्देनजर चुनाव आयोग और लोकसभा अध्यक्ष उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी मेरे पिता द्वारा बनाई गई थी और मैं इसे इस तरह टूटते नहीं देख सकता। जरूरत पड़ी तो मैं सुप्रीम कोर्ट का रुख करूंगा। चिराग ने कहा कि मैं एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार हूं। मैं शेर का बेटा हूं और मुझे डर नहीं है। मैं लोजपा अध्यक्ष हूं।

चिराग पासवान ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से पशुपति कुमार पारस को सदन में पार्टी के नेता के रूप में मान्यता देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोजपा संविधान अपने संसदीय बोर्ड को संसद में अपने नेता के बारे में फैसला करने के लिए अधिकृत करता है। उन्होंने कहा कि मेरे चाचा के नेतृत्व वाला गुट एक स्वतंत्र समूह हो सकता है लेकिन लोजपा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर अध्यक्ष से मिलने की कोशिश करेंगे।

वहीं, लोजपा महासचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि चिराग पासवान के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पहले के चुनाव की प्रतिपुष्टि करने के लिए रविवार को दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के 90 से अधिक स्वीकृत सदस्य हैं और गुरुवार को पटना में हुई बैठक में उनमें से बमुश्किल 9 मौजूद थे, जिसमें पासवान के चाचा पारस को उनके स्थान पर अध्यक्ष चुना गया था।

पासवान गुट ने यह भी कहा कि पशुपति के नेतृत्व वाले समूह ने उन्हें एक व्यक्ति एक पद के आधार पर पद से हटा दिया था लेकिन अब उनको लोकसभा में पार्टी नेता और दलित सेना का प्रमुख के पद पर रहने के बावजूद अध्यक्ष चुना गया है। लोजपा के पास लोकसभा में पासवान सहित छह सांसद हैं और राज्यसभा में एक भी सदस्य नहीं है। इसके पांच सांसदों ने हाल ही में पासवान के स्थान पर पारस को अपना अध्यक्ष चुना है। उन सभी पांचों के अध्यक्ष से मुलाकात किये जाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने उनके चुनाव को अधिसूचित किया।

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