दूरसंचार विभाग ने 59 चीनी मोबाइल ऐप को डिलीट करने के दो दिन बाद बुधवार को दूरसंचार विभाग की बीएसएनएल और एमटीएनएल की 4 जी सेवाओं को अपग्रेड करने के लिए निविदा रद्द कर दी। सूत्रों के मुताबिक ऐसा चीनी कंपनियों को झअका देने के लिए किया गया है। केंद्र सरकार ने बीएसएनएल को निर्देश दिया था कि वह अपग्रेड के लिए चीनी उपकरण का इस्तेमाल न करे, जिसकी लागत 7,000-8,000 करोड़ रुपये है। नई प्रक्रिया से चीनी कंपनियों के अयोग्य होने की संभावना बढ़ गई है। DoT भारत में निर्मित उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए निजी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ परामर्श कर रहा है।

बता दें सरकार ने सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा मद्देनजर 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया। आईटी मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसे विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ मोबाइल ऐप के दुरुपयोग के बारे में कई रिपोर्ट शामिल हैं। इन रिपोर्ट में कहा गया है कि ये एप उपयोगकर्ताओं के डेटा को चुराकर, उन्हें गुपचुक तरीके से भारत के बाहर स्थित सर्वर को भेजते हैं।

बैन लिस्ट में ये ऐप भी शामिल

प्रतिबंधित सूची में वीचैट , बीगो लाइव ,हैलो, लाइकी, कैम स्कैनर, वीगो वीडियो, एमआई वीडियो कॉल – शाओमी, एमआई कम्युनिटी, क्लैश ऑफ किंग्स के साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफार्म क्लब फैक्टरी और शीइन शामिल हैं।

महाराष्ट्र सरकार भी चीनी प्रोजेक्ट्स को लेकर ले चुकी है बड़ा फैसला

पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार ने भी चीनी प्रोजेक्ट्स को लेकर एक बड़ा फैसला लिया। महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने चीन की तीन कंपनियों के साथ हुए करार पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि मैग्नेटिक महाराष्ट्र 2.0 समिट में राज्य सरकार ने तीन चीनी कंपनियों के साथ पांच हजार करोड़ के निवेश के प्रोजेक्ट पर साइन किए थे। महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि हमने यह फैसला केंद्र सरकार के परामर्श से लिया है। उन्होंने बताया कि भारत-चीन सीमा पर 20 भारतीय सैनिकों की हत्या से पहले इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय ने चीनी कंपनियों के साथ किसी भी अन्य समझौते पर हस्ताक्षर न करने की राज्य सरकार को सलाह दी है। उन्होंने बताया कि मैग्नेटिक महाराष्ट्र 2.0 समिट में राज्य सरकार ने दुनियाभर की कंपनियों से 16000 करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे जिनमें चीनी कंपनियां भी शामिल थीं। 

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इसमें पुणे में तालेगांव में ऑटोमोबाइल विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए चीन की ग्रेट वॉल मोटर्स के साथ 3,770 करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया था। इसमें चीन की फोटॉन और पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी के बीच 1,000 करोड़ रुपये की साझेदारी शामिल है। इसके अलावा, हेंग्लू इंजीनियरिंग ने पुणे में अपनी इकाई फेज II में विस्तार की योजनाओं के लिए 250 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई थी।चीन के अलावा अमेरिका, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और कई बड़ी कंपनियों ने नौ अन्य समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे।

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के लिए चीनी कंपनी को अभी नहीं मिला है टेंडर

बता दें भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई झड़प के बाद दिल्ली-मुंबई हाईवे को लेकर काफी चर्चा होने लगी। कहा गया कि इस प्रस्तावित रेल रूट पर 5.6 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड हिस्से को बनाने के लिए चीन की कंपनी को टेंडर दिया गया है। सोशल मीडिया में इसके खिलाफ आवाज उठने लगी। इसके बाद केंद्र सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि अभी तक इस काम को लेकर टेंडर फाइनल नहीं किया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया, ‘यह स्पष्ट है कि इसका निर्माण एडीबी के फंड से होगा। इसके तहत टीबीएम और एक आरआरटीएस स्टेशन से गुजरने वाले 5.6 किमी लंबे सुरंग के डिजाइन और निर्माण का काम होगा। पिछले साल नौ नवंबर को इसके लिए टेंडर मांगे गए थे, जिसे तकनीक रूप से 16 मार्च को खोला गया।’

इस प्रोजेक्ट के लिए पांच कंपनी ने टेंडर दिया। उनमें SKEC (कोरिया) और Tata, STEC (चीन), L&T (भारत), Afcons (भारत) और GulermakAgir (तुर्की) शामिल हैं। STEC (चीन) ने सबसे सस्ता टेंडर दिया है। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि अभी तक टेंडर को फाइनल नहीं किया गया है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि एडीबी या विश्व बैंक या बहु-पार्श्व खरीद दिशानिर्देश फर्म या देश के बीच भेदभाव की अनुमति नहीं देते हैं।

 





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