पाकिस्तान में काम कर रही कुछ चीनी कंपनियां पाकिस्तानी कर्मचारियों को नमाज अदा करने के लिए समय नहीं दे रही हैं। यह दावा पाकिस्तान के एक मौलाना ने किया है। समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में अब इसके खिलाफ आवाजें भी उठने लगी हैं।  बता दें नमाज इस्लाम के पांच बुनियादी सिद्धांतों में से एक है।26 जून को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में एक मौलाना को पाकिस्तानियों से एकजुट होने और पाकिस्तान में मौजूद चीन के लोगों से यह कहने का आग्रह करते देखा गया कि यह देश उनका नहीं है। मौलवी ने कहा है, ‘हम नमाज को नजरअंदाज नहीं कर सकते। लोग डरते हैं कि वे अपनी नौकरी खो देंगे, लेकिन यह अब हमारे लिए आत्मसम्मान का मुद्दा बन गया है।’

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चीन को पाकिस्तान का सदाबहार और सबसे प्रिय मित्र देश के रूप में जाना जाता है। चीन का पाकिस्तान सबसे भरोसेमंद सैन्य साझेदार है, लेकिन बीजिंग अपने यहां के चीनी मुस्लिमों, खास तौर से उत्तर पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में उइगर के प्रति आक्रामक बना हुआ है। जल्दी ही पाकिस्तानी जनता की राय पर चीन अपनी पकड़ खो सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के साथ काम करने में चीन को दिक्कत हो सकती है। 

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यही नहीं चीन ने अपने यहां भी मुस्लिम आबादी पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक अभियान छेड़ा हुआ है। चीन की सरकार अपने यहां बहुमत वाले हान जाति के लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों के बीच जन्म दर को कम करने के लिए कठोर बनी हुई है। बीते दिनों संयुक्‍त राष्‍ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा था कि चीन के शिंजियांग प्रांत के मुस्लिम बहुल इलाके में उइगर मुसलमानों के साथ बेहद बर्बर व्यवहार हो रहा है। शिनजियांग के करमाय शहर में दाढ़ी वाले पुरुषों और मुस्लिम हेडस्कार्व्स वाली महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने पर प्रतिबंध है। 





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