पूर्वी लद्दाख को लेकर चल रहे तनाव के बीच केंद्र सरकार चीन सीमा से सटी दारबुक-दौलतबेग ओल्डी सड़क परियोजना पर काम तेज कर दिया है। सरकार ने 250 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क परियोजना का निर्माण कार्य आगामी छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सामरिक दृ़ष्टि से यह सड़क परियोजना भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों ने बताया कि लॉकडाउन के चलते सड़क निर्माण का कार्य रुक गया था। कोरोना के चलते मजदूर नही मिल रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मजदूर काम पर पहुंच गए हैं और सड़क निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 250 किलोमीटर लंबी सड़क के बनने से सशस्त्र सुरक्षा बलों, रसद व गोला-बारुद का सड़क परिवहन से आगमन सरल हो जाएगा। इससे लेह से दौलतबेग ओल्डी तक पहुंचने का समय छह से आठ घंटे कम हो जाएगा।
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विदत हो कि समुद्र तल से 16000 फीट की ऊंचाई पर स्थित दारबुक-दौलतबेग सड़क परियोजना लगभग दो दशक पुरानी है। परियोजना को 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इस पर 320 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान है। हालांकि परियोजना में देरी होने के कारण उक्त धनराशि में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। चीनी सैनिकों के पूर्वी लद्दाख में घुसपैठ के बाद पैदा हुए तनाव को देखते हुए बीआरओ दिसंबर 2020 तक उक्त सड़क निर्माण को पूरा करना चाहता है। जिससे चीन सीमा पर सेना व बख्तरबंद गाड़ियों का निर्बाध आागमन हो सके।
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बीआरओ सूत्रों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र के जटिल माहौल में कार्य करने में अभ्यस्त झारखंड के मजदूर का एक दल विभिन्न सड़क परियोजनओं में काम करने के लिए लद्दाख क्षेत्र के लिए रवाना हो चुका है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरोन ने रविवार (14 जून) को दुमका रेलवे स्टेशन से 1500 मजूदरों की स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। इसके पूर्व स्थानीय प्रशासन व बीआरओ के बीच मजदूरों के देय व कल्याण संबंधी करार पर हस्ताक्षर भी किए गए।







