डाक विभाग ने छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है। अब छोटी बचत योजना के क्लेम को स्वीकार करने के लिए गवाहों की डाकघर में शारीरिक मौजूदगी जरूरी नहीं है। दरअसल, डाक विभाग को ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि मृत व्यक्तियों के पीपीएफ या किसी अन्य छोटी बचत योजना के क्लेम को स्वीकार करने के लिए अधिकारी उनके नॉमिनी को दो गवाह लाने को कहते हैं। इसको देखते हुए डाक विभाग ने नॉमिनी के लिए नियम में बदलाव किया है। इसके तहत अगर नॉमिनी स्व-अभिप्रमाणित पहचान पत्र और पते का सबूत लेकर आता है तो डाकघर क्लेम स्वीकार करने से मना नहीं कर सकता।
पांच लाख तक का दावा आसानी से मिलेगा
नए नियम के मुताबिक, अगर दावा की रकम पांच लाख रुपये तक है तो समाधान संबंधित प्राधिकरण के विवेक के आधार पर किया जा सकता है। वहीं, दावा की रकम पांच लाख रुपये से ज्यादा होने पर और साक्ष्य मौजूद नहीं हैं तो कोर्ट से सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। डाकधर की किसी भी बचत योजना के दावा के लिए पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, फोटो के साथ राशन कार्ड, पोस्ट ऑफिस आईडी कार्ड, केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, पैन कार्ड मान्य है।
ये दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे
1. मृत्यु प्रमाणपत्र
2. पासबुक/ जमा रसीद
3. फॉर्म-13 में हलफनामा
4. फॉर्म-14 में लेटर ऑफ डिस्क्लेमर
5. फॉर्म-15 में बॉन्ड ऑफ इनडेमनिटी
नॉमिनी की मौत होने पर
अगर छोटी बचत में निवेशक के साथ नॉमिनी की भी मौत किसी कारण से हो जाती है तो दावा को नॉमिनी के कानूनी वारिस के पक्ष में सेटेल किया जाएगा। इसे मृतक डिपॉजिटर के कानूनी वारिस के पक्ष में सेटेल नहीं किया जाएगा।ऐसे मामलों में जहां नॉमिनेशन रजिस्टर नहीं किया गया है, उनमें दावा के लिए कानूनी सबूत देने होंगे। इनमें सक्सेशन सर्टिफिकेट, वसीयत, प्रशासनिक पत्र इत्यादि शामिल हैं। एप्लीकेशन फॉर्म और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ क्लेम करने वाले को डिपॉजिटर का ओरिजनल डेथ सर्टिफिकेट मुहैया कराने की जरूरत होगी।







