जब केंद्रीय विद्यालय ने मुस्लिम लड़कियों के लिए शुरू किया था हिजाब, 49 साल बाद पहली बार बदला था ड्रेस कोड


केंद्रीय विद्यालयों ने 10 साल पहले ही मुस्लिम छात्राओं के लिए खास तरह का हिजाब शुरू किया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 4 जुलाई 2012 को केंद्रीय विद्यालयों के लिए नए यूनिफॉर्म  पैटर्न का ऐलान किया था। शिक्षा मंत्रालय के अंतरगत आने वाले केंद्रीय विद्यालय संगठन ने स्टूडेंट्स के ड्रेस कोड में पहली बार बदलाव किया था। 1963 के बाद केंद्रीय विद्यालय के ड्रेस में कोई बदलाव नहीं किया गया था। 

इस बदलाव में हिजाब और पगड़ी के लिए नया पैटर्न लाया गया था। केवीएस बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने 18 मई 2012 को हुई बैठक में फैसला किया गया था कि मुस्लिम छात्राओं को लाल गोटे के साथ लोअर के रंग का हिजाब पहनना होगा। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि मंत्रालय ने नए यूनिफॉर्म में अलग पहचान बनाने और लोगों की सुविधा और कीमत को ध्यान में रखकर फैसला किया है। 

इसी फैसले में लड़कों और लड़कियों के ड्रेस में चेक लागू किया गया था। इसके अलावा कक्षा 9 से 11 तक के  छात्राओं के लिए ट्राउजर शुरू किया गया था। नई यूनिफॉर्म का डिजाइन तैयार करने में नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलजी और केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय शामिल था। 

बता दें कि वर्तमान में देशभर के 1248 केंद्रीय विद्यालयों में 14.35 स्टूडेंट्स हैं जिसमें से 6.55 लाख छात्राएं और 7.79 लाख छात्र हैं। 2015 में केंद्रीय विद्यालय में 12.9 लाख स्टूडेंट्स थे जिसमें से 56719 मुस्लिम थे। इनमें से भी 23621 मुस्लिम लड़कियां थीं। 

नए ड्रेस कोड के बारे में सवाल का जवाब देते हुए 8 अगस्त 2012 को मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा था कि ड्रेस के बदलाव में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह सब केंद्रीय विद्यालय संगठन ने किया है और वह एक स्वतंत्र संस्था है। हालांकि केवीएस की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई थी। 1963 के बाद पहली बार ड्रेस कोड में बदलाव किया गया है।



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