जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर रविवार को हुए ड्रोन अटैक में इस्तेमाल की गई तकनीक से पता चलता है कि इसे स्टेट सपोर्ट था। इसके अलावा इसमें पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का स्थान होने का भी संकेत मिलता है। भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सेना ड्रोन वारफेयर को लेकर पूरी तरह से सतर्क है और हमें पता है कि कैसे ऐसी हरकतों को स्टेट सपोर्ट मिल रहा है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लेकर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन स्टेट एक्टर्स से उनका सीधा इशारा पाकिस्तान की ओर ही था। 15 कॉर्प्स के कमांडर डीपी पांडेय ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि सेना ऐसे खतरों को लेकर विकल्पों को विचार कर रही है कि कैसे इनका जवाब दिया जाए। 

लेफ्टिनेंट जनरल पांडेय ने कहा कि हम अच्छी तरह से जानते हैं कि ड्रोन वारफेयर के लिए जिस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे सड़क किनारे नहीं तैयार किया जा सकता। इससे संकेत मिलता है कि इनको स्टेट सपोर्ट सिस्टम से मदद मिल रही थी और तकनीक भी मुहैया कराई जा रही है। हालांकि उन्होंने इस घटना को लेकर चल रही जांच के बारे में कोई डिटेल देने से इनकार कर दिया। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि अब तक मिली जानकारी से पता चलता है कि इसे स्टेट एक्टर्स की ओर से मदद मिल रही है। 

स्थानीय स्तर पर ड्रोन तैयार किए जाने की संभावना को लेकर उन्होंने कहा कि ड्रोन्स को स्थानीय स्तर पर भी मॉडिफाई किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए एक जरूरी गाइडेंस चाहिए होती है। बता दें कि बीते कई सालों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन्स का इस्तेमाल कर सीमा पार हथियार गिराने की कोशिशें हुई हैं। इससे पहले अगस्त 2019 में अमृतसर में एक क्रैश ड्रोन पाया गया था। इसके कुछ दिन बाद ही सुरक्षा बलों ने कुछ आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने 8 ड्रोन्स का इस्तेमाल कर ड्रग्स और हथियार गिराए जाने का खुलासा किया था। इसके अलावा बीते साल जून में बीएसएफ ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक स्पाई ड्रोन को मार गिराया था।



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