भारतीय वायुसेना ने यह आधिकारिक तौर पर कबूल किया है कि शनिवार और रविवार की आधी रात को जम्मू के एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन से हमला हुआ. स्क्वाड्रन लीडर और इंडियन एयर फोर्स के उस बेस के सिक्योरिटी इंचार्ज ने अपनी लिखित शिकायत में यह कहा है कि किसी अज्ञात ड्रोन के जरिए यह हमला कराया गया. सबसे बड़ी बात ये है कि एफआईआर में यह नहीं बताया गया है कि ये ड्रोन सीमा पार से आए थे या फिर कहीं और से. इसका संकेत ये है कि किसी आसपास के संदिग्ध से ये तार जुड़े हुए हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक इसकी जांच एनआईए ने शुरू नहीं की है, लेकिन आने वाले समय में इसकी जांच एनआईए के हाथ में दी जा सकती है. वायुसेना ने जम्मू पुलिस में जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें ड्रोन से हमला होने का जिक्र किया गया है. सिर्फ एयरफोर्स स्टेशन ही नहीं कालूचक मिलिट्री स्टेशन को भी निशाना बनाया गया. गनीमत ये रही कि सेना ने उस संभावित ड्रोन अटैक को नाकाम कर दिया. ये देश में अपनी तरह का पहला मामला है जब सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है.

1-ये बात सामने आ रही है कि सीमा पार से ऑपरेट किए जा रहे थे हमले वाले ड्रोन.

2-सूत्रों ने बताया कि हमला में हाई ग्रेड एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल गया जो आरडीएक्स या टीएनटी हो सकता है.

3-गूगल अर्थ पर इलाका दिखता है इसलिए रेकी को जरूरत नहीं थी.

4-एयरफोर्स स्टेशन पर हमला 27 जून की रात 1.37 पर हुआ था.

5-पहले हमले के 6 मिनट बाद दूसरा ड्रोन हमला किया गया.

6-जांच एजेंसियों को हमले में इस्तेमाल ड्रोन का कोई हिस्सा नहीं मिला.

7-आशंका है कि हमले के बाद दोनों ड्रोन वापस सुरक्षित लैंड किया.

8-कल रात रतनुचक-कालूचक मिलिट्री एरिया में ड्रोन देखे गए.

9-पहले भी हथियार के लिए ड्रोन का इस्तेमाल हो चुका है.

10-पहली बार हमले के लिए भारत में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है.

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