भारत में प्रतिबंधित टिक-टॉक ऐप अब चीन से नाता तोड़ना चाहता है। बायटेंस लिमिटेड ने कहा कि यह अपने टिक टॉक कारोबार के कॉर्पोरेट ढांचे में परिवर्तन करने के बारे में सोच रहा है। अमेरिका की चिंता मूल कंपनी के चीनी ओरिजिन को लेकर है। इसको लेकर कंपनी के एक्जीक्यूटिव्स की बैठक हुई। बैठक में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक इसमें टिक-टॉक के लिए एक नया प्रबंधन बोर्ड बनाने और चीन के बाहर ऐप के लिए एक अलग मुख्यालय स्थापित करने जैसे विकल्पों पर चर्चा की गई।
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न्यूज एजेंसी ब्लूम्बर्ग के मुताबिक शार्ट वीडियो और संगीत ऐप TikTok वर्तमान में बायटेंस से अलग अपना मुख्यालय नहीं है। यह चीन के केमैन आइलैंड्स में स्थित है। वैश्विक आधार पर टिक टॉक अपना नया हेडक्वार्टर खोलने के लिए कई स्थानों पर विचार कर रहा है। बता दें इसके पांच सबसे बड़े कार्यालय लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क, लंदन, डबलिन और सिंगापुर में हैं। वहीं एएनआई के मुताबि चीन द्वारा नया नेशनल सिक्योरिटी लॉ लाने के बाद टिक टॉक ने हांगकांग के मार्केट से हटने का फैसला किया है।
आस्ट्रेलिया भी लगा सकता है प्रतिबंध
बता दें भारत और अमेरिका की तरह आस्ट्रेलिया में भी कई सांसद टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव कर रहे हैं। हाल ही में लिबरल पार्टी के सीनेटर जिम मोलन ने कहा कि चीन सरकार टिक टॉक का उपयोग और दुरुपयोग कर रही है। वहीं टिक टॉक ने गुरुवार को बताया कि गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर उसने पिछले साल की दूसरी छमाही में अपने प्लेटफॉर्म्स से 4.9 करोड़ से ज्यादा वीडियो को हटाया था।इनमें से करीब एक तिहाई वीडियो भारत के थे। इसके बाद हटाए गए सबसे ज्यादा वीडियो अमेरिका और पाकिस्तान के थे।







