सरकार ने जीएसटी मुआवजे के बदले बैक-टू-बैक ऋण सुविधा के तहत राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को आज 44,000 करोड़ रुपये जारी किए।  इससे पहले जारी की गई 1,15,000 करोड़ रुपये की राशि को ध्यान में रखते हुए, चालू वत्ति वर्ष में जीएसटी मुआवजे के बदले में बैक-टू-बैक ऋण के रूप में कुल 1,59,000 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। यह राशि वास्‍तविक उपकर संग्रह में से हर 2 महीने में जारी किए जाने वाले सामान्‍य जीएसटी मुआवजे के अतिरिक्त है।

जीएसटी परिषद की 43वीं बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया था कि केन्‍द्र सरकार 1.59 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी और मुआवजा निधि में अपर्याप्‍त राशि के कारण मुआवजा कम जारी किए जाने से संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को बैक-टू-बैक ऋण के आधार पर जारी करेगी। यह राशि वत्ति वर्ष 2020-21 में इसी प्रकार की सुविधा के लिए अपनाए गए सद्धिांतों के अनुसार है, जहां इसी प्रकार की व्‍यवस्‍था के तहत राज्यों को 1.10 लाख करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। 1.59 लाख करोड़ रुपये की यह राशि 1 लाख करोड़ रुपये (उपकर संग्रह के आधार पर) से अधिक के उस मुआवजे के अतिरक्ति होगी, जिसे इस वत्तिीय वर्ष के दौरान राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों (विधानसभा वाले) को जारी किए जाने का अनुमान है। कुल 2.59 लाख करोड़ रुपये की यह राशि वत्ति वर्ष 2021-22 में मिलने वाली जीएसटी मुआवजे की राशि से अधिक होने का अनुमान है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार सभी पात्र राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने बैक-टू-बैक ऋण सुविधा के तहत मुआवजे की कमी के वत्तिपोषण की इस व्यवस्था पर सहमति व्यक्त की है। कोविड-19 महामारी की प्रभावी प्रतक्रिया तथा प्रबंधन और पूंजीगत व्यय की दिशा में कदम उठाने के लिए सभी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों की उनके प्रयासों में सहायता करने के लिए, वत्ति मंत्रालय ने वत्ति वर्ष 2021-22 के दौरान बैक-टू-बैक ऋण सुविधा के तहत 1,59,000 करोड़ रुपये की सहायता जारी की है।

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