Data Protection Bill: डाटा सुरक्षा को लेकर ‘वैयक्तिक डाटा संरक्षण विधेयक 2019’ से संबंधित संयुक्त समिति की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गई. रिपोर्ट के मुताबिक अब विदेशी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म भारतीय डाटा को विदेश नहीं भेज पाएंगे. रिपोर्ट में समिति ने सोशल मीडिया मंचों के लिए कोई आचार संहिता नहीं होने पर चिंता भी जताई और कहा कि सोशल मीडिया मंच पर मौजूद डाटा को लेकर अब कंपनी को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए.

सोशल मीडिया मंचों के संदर्भ में बने एक प्रभावी तंत्र- समिति

संसद की संयुक्त समित ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोशल मीडिया मंचों के संदर्भ में एक प्रभावी तंत्र बनना चाहिए. बीजेपी सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सोशल मीडिया मंचों के लिए आचार संहिता नहीं होने और स्व विनिमयन की व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी चिंता प्रकट की. उन्होंने कहा, ‘‘समिति के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय यह था कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून में सोशल मीडिया मंचों को मध्यस्थ कहा गया है. समिति का मत है कि इन मंचों पर दी गई विषय-वस्तु के लिए उन्हें उत्तरदायी बनाना चाहिए. इस उद्देश्य के लिए उन्हें उपयोगकताओं को स्वयं की पहचान बताने के लिए कहना चाहिए और सत्यापन को अनिवार्य बनाना चाहिए.’’

194 में से 132 देशों में डाटा सुरक्षा के कनून लागू- समिति

संयुक्त समिति ने यह भी कहा, ‘‘एक ऐसा तंत्र बनाया जा सकता है कि जिसमें इन मंचों पर उपलब्ध सामाग्री के लिए इनको ही उत्तरदायित्व ठहराया जाए.’’ समिति ने जोर देकर यह भी कहा कि इस विधेयक में ‘डाटा भंग’ शब्द को परिभाषित किया जाना चाहिए. समिति ने डेटा और निजता के संरक्षण पर जोर दिया और कहा कि डेटा राष्ट्रीय महत्व की एक परिसंपत्ति है. दुनिया के 194 देशों में से 132 ने व्यक्तिगत डाटा और व्यक्तिगत सुरक्षा को सुरक्षित करने के लिए विनियम और कानून लागू किए हैं.

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