CIA Chief Secret Meeting With Taliban: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने देश की खुफिया एजेंसी के प्रमुख को तालिबान के चीफ से मिलने के लिए भेजा. इन दोनों के बीच सोमवार को मुलाकात हुई है. वाशिंगटन पोस्ट ने मंगलवार को खबर दी है कि अफगानिस्तान की राजधानी पर तालिबान के कब्जे के बाद यह पहली उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत हुई है.
वाशिंगटन पोस्ट ने अमेरिकी अधिकारिक सूत्रों के हवाले बताया कि सीआईए के डायरेक्टर विलियम बर्न्स और तालिबान के नेता अब्दुल गनी बरादर के बीच सोमवार को काबुल में मुलाकात हुई है. उन दोनों के बीच यह मुलाकात ऐसे वक्त पर हुई है जब काबुल एयरपोर्ट पर हंगामे के बीच बाइडेन प्रशासन लगातार अमेरिकी और अन्य सहयोगी देशों के नागरिकों को वहां से निकालने का प्रयास कर रहा है.
CIA Dir. Burns held a secret meeting in Kabul on Monday with Taliban’s de facto leader Abdul Ghani Baradar in the highest-level face-to-face encounter between the Taliban and the Biden administration since the Taliban seized Kabul, according to US officials: The Washington Post
— ANI (@ANI) August 24, 2021
गौरतलब है कि इससे पहले तालिबान ने अमेरिका को तय समय-सीमा 31 अगस्त तक अफगानिस्तान छोड़ने या फिर अंजाम भुगतने की धमकी दी है. दरसअसल तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने पूछा कि अगर अमेरिका और ब्रिटेन लोगों को अफगानिस्तान से निकालने की समय सीमा को 31 अगस्त से आगे बढ़ाने को कहते हैं तो क्या आप उसे मान जाएंगे ? इस पर तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा नहीं.
पत्रकार के क्यों पूछना पर तालिबानी प्रवक्ता ने कहा, ”आप इसे एक तरह की रेड लाइन कह सकती हैं. राष्ट्रपति बाइडेन ने घोषणा की थी कि वे 31 अगस्त तक यहां (अफगानिस्तान) से सारी सेना वापस बुला लेंगे लेकिन अगर वे समय सीमा बढ़ाते हैं तो इसका मतलब है कि वे यहां कब्जे की तारीख भी आगे बढ़ा रहे हैं. जबकि यहां इसकी कोई जरूरत नहीं है. मुझे लगता है कि ये रिश्तों को खराब करेगा और हमारे बीच अविश्वास पैदा करेगा. अगर वे फिर भी समय सीमा बढ़ाने की जिद करते हैं तो उसपर रिएक्शन होगा.” इस बयान के जरिए तालिबान ने साफ कर दिया है कि वो 31 अगस्त के बाद अफगानिस्तान की जमीन पर अमेरिका या ब्रिटेन का नामोनिशान नहीं देखना चाहता है.
तालिबान का ये बयान आया को अमेरिका ने भी जवाब देने में वक्त नहीं लगाया. अमेरिका ने साफ किया कि महीने के अंत के बाद उसका भी अफगानिस्तान में रुकने का कोई इरादा नहीं है.
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