भारत तेल आयात बिल को घटाने के लिए सरकारी और निजी रिफाइनरी कंपनियों के साथ एक नए गठजोड़ बनाने पर काम कर रहा है। तेल सचिव तरुण कपूर ने यह जानकारी दी है।मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआत में रिफाइनरी समूह 15 दिनों में एक बार बैठक करेगा और कच्चे तेल की खरीद पर अपने योजना का आदान-प्रदान करेगा। सूत्रों के अनुसार, सस्ते कच्चे तेल की खरीदारी के लिए कंपनियां संयुक्त रणनीति बना सकती हैं और जहां भी संभव हो वे संयुक्त बातचीत के लिए जा सकती हैं। भारत सरकार की कुछ रिफाइनरी पहले से ही संयुक्त रूप से कच्चे तेल की खरीद पर बातचीत कर रही है। उल्लेखनीय है कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल मध्य पूर्व और खाड़ी देशों से खरीदता है। हाल के दिनों में कच्चे तेल में उछाल से भारत का तेल आयात बिल कई गुना बढ़ गया है। इससे कोरोना संकट के बीच सरकार की परेशानी बढ़ी है।
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व्यापार घाटा बढ़कर 22.6 अरब डॉलर हुआ
सितंबर में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 22.6 अरब डॉलर हो गया, जो कम से कम 14 वर्षों में सबसे ज्यादा है। भारत का व्यापार घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमत में उछाल आना है। कपूर ने कहा कि पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और उसके सहयोगियों, जिन्हें ओपेक + के रूप में जाना जाता है, को वैश्विक तेल की कीमतों को नीचे लाने के लिए उत्पादन बढ़ाना चाहिए।
सस्ता कच्चा तेल खरीदने की रणनीति पर काम
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत वह कच्चे तेल की खरीद किसी ऐसे देश से करेगा, जो उसके मुताबिक कारोबारी शर्तों के साथ सस्ती दरों की पेशकश करेगा। भारत की रिफाइनरी कंपनियां सप्लाई में विविधीकरण के लिए पश्चिम एशिया के बाहर से अधिक तेल की खरीद पर जोर दे रही हैं। भारत की प्राथमिकता सस्ती दरों पर सप्लाई प्राप्त करने की है। यह कोई भी देश हो सकता है। हाल के दिनों में भारत, सऊदी अरब के ऊपर अमेरिका को तरजीह दे रहा है।
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उत्पादक देशों की गुटबाजी तोड़ने की कोशिश
सूत्रों ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें और अनुबंध की शर्ते तय करने के मामले में उत्पादक देशों की गुटबाजी तोड़ने के लिए सरकार ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को अन्य क्षेत्रों में तेल खरीद की संभावना पर कदम बढ़ाने को कहा है। साथ ही उनसे एकजुट होकर अपनी शर्तो पर आपूर्तिकर्ताओं से बात करने को कहा गया है।
इन देशों पर अभी निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल इराक, अमेरिका और सऊदी प्रमुख तेल आयात करता है। सऊदी जहां भारत के लिए पारंपरिक तेल निर्यातक देश रहा, वहीं अमेरिका बीते दशक में इसमें बाजी मार रहा है। दरअसल तेल बाजार में पिछले एक दशक के दौरान काफी बदलाव आए हैं। सऊदी अरब के लंबे वर्चस्व पर सेंध लगाते हुए अमेरिका में भी शेल इंडस्ट्री के जरिए कच्चे तेल के उत्पादन में भारी इजाफा हुआ है। रुस इसमें पहले से ही आगे रहा है। यानी सऊदी, रूस और अमेरिका ये तीन देश दुनियाभर को सबसे ज्यादा तेल दे रहे हैं।







