नई दिल्ली
शनिवार से राजधानी में भी प्रदूषण ने रफ्तार पकड़ ली है। दिल्ली एनसीआर की हवा अब तेजी से खराब होने लगी है। लगभग सभी हॉट स्पॉट खराब श्रेणी में पहुंच चुके हैं। डीटीयू में दोपहर 1 बजे तक एयर इंडेक्स बेहद खराब स्थिति में रहा। वहीं, पिछले साल की तुलना में इस बार पराली के मामले तीन गुना से अधिक बढ़ गए हैं। ऐसे में अब एक्सपर्ट आशंका जता रहे हैं कि अक्टूबर के मध्य तक राजधानी में दम घुटने की नौबत आ सकती है।

राजधानी में शनिवार को एक बजे तक एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 195 तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद धूप और हवा की वजह से इसमें कुछ कमी आई। सीपीसीबी के एयर बुलेटिन में एक्यूआई 189 रहा। एनसीआर की बात करें तो बागपत में 233, भिवाड़ी में 264, बुलंदशहर में 230, धारूहेड़ा में 212, फरीदाबाद में 203, गाजियाबाद में 212, मानेसर में 203, मेरठ में 215, मुरादाबाद में 225 दर्ज हुआ। सफर के पूर्वानुमान के अनुसार, अब हवा धीरे-धीरे खराब होती जाएगी। 5 अक्टूबर तक यह खराब श्रेणी में आ जाएगी। पराली का धुंआ भी राजधानी को प्रदूषित कर रहा है। साथ ही, अब पीएम 2.5 का स्तर भी बढ़ने लगा है।

पंजाब के बाद हरियाणा में भी पराली की शुरुआत काफी तेज हुई है। पिछले साल 25 से 30 सितंबर के बीच हरियाणा में पराली जलाने के 31 मामले सामने आए थे, लेकिन इस बार इनकी संख्या 175 रही। पिछले साल की तुलना में इस दौरान पांच गुना अधिक पराली जली है। करनाल, कैथल, फतेहाबाद, अंबाला, यमुनानगर, हिसार, जींद में ज्यादातर पराली जलाने की घटनाएं हो रही हैं। सेफ (सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवायरनमेंट) के फाउंडर विक्रांत तोगंड ने बताया कि कोरोना काल में सभी पर असर पड़ा है। इसलिए किसानों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। इसलिए वह पराली के नाम पर पैसा खर्च करने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि आग के मामले बढ़े हैं। उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन पेट्रोल और डीजल के पैसे भी किसानों के पास नहीं हैं। आशंका है कि इस बार पराली काफी ज्यादा जल सकती है। इसे रोकने के लिए सरकार को किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझना होगा और उनकी मदद करनी होगी।

ईपीसीए के अनुसार, 2019 में 10 अक्टूबर के आसपास प्रदूषित दिन शुरू हुए थे। 10 अक्टूबर 2019 को एक्यूआई 211 को छू गया था। इस बार भी पूरा प्रयास है कि 15 अक्टूबर से पहले खराब दिनों की शुरुआत न होने पाए। हॉट स्पॉट पर टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। सभी सिविक बॉडी को धूल व ओपन बर्निंग को लेकर सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।



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