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राजधानी में कोरोना वायरस के बढ़ते केसेज के बीच, होम आइसोलेशन के नियमों में बदलाव हुआ है। अब कोविड-19 पॉजिटिव आने पर मरीज पहल कोविड सेंटर भेजे जाएंगे। वहां पूरी तरह संतुष्‍ट होने के बाद ही होम आइसोलेशन में रहने की परमिशन दी जाएगी। अब दिल्‍ली सरकार ने होम आइसोलेशन में रहने वालों को पोर्टेबल पल्‍स ऑक्‍सीमीटर देने का फैसला किया है। इससे वे कुछ घटों के अंतराल पर अपना ऑक्‍सीजन लेवल चेक कर सकेंगे। एक बार मरीज ठीक हो जाए, फिर उसे पल्‍स ऑक्‍सीमीटर दिल्‍ली सरकार को वापस करना होगा। पल्‍स ऑक्‍सीमीटर काम कैसे करता है और इससे कोरोना मरीजों को क्‍या मदद मिलेगी, आइए समझते हैं।

एक साथ दो काम करती है ये छोटी सी मशीन

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पल्‍स ऑक्‍सीमीटर एक छोटी सी डिवाइस होती जो मरीज की उंगली में फंसाई जाती है। इसे उसकी नब्‍ज और खून में ऑक्‍सीजन की मात्रा का पता चलता है। नॉर्मली इसका यूज सर्जरी के बाद पेशंट को मॉनिटर करने में होता है। सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीज भी इसे घर में रखते हैं। पल्‍स ऑक्‍सीमीटर का डेटा ये बताता है कि मरीज को एक्‍स्‍ट्रा ऑक्‍सीजन की जरूरत है या नहीं।

बिना खून ल‍िए पता लगाती है कितनी ऑक्‍सीजन मौजूद

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पल्‍मोनरी डिजीज एक्‍सपर्ट डॉक्‍टर माइक हेंसन अपने यूट्यूब चैनल पर समझाते हैं कि ये मशीन कैसे काम करती है। पल्‍स ऑक्‍सीमीटर दरअसल आपकी स्‍किन पर एक लाइट छोड़ता है। फिर ब्‍लड सेल्‍स के रंग और उनके मूवमेंट को डिटेक्‍ट करता है। जिन ब्‍लड सेल्‍स में ठीक मात्रा में ऑक्‍सीजन होती है वे चमकदार लाल दिखाई देती हैं जबकि बाकी गहरी लाल दिखती हैं। इन दोनों के अनुपाल के आधार पर मशीन ऑक्‍सीजन सैचुरेशन को पर्सेंटेज में कैलकुलेट करती है। यानी अगर मशीन 97% की रीडिंग दे रही है मतलब 3% रक्‍त कोशिकाओं में ऑक्‍सीजन नहीं है।

कुछ पर्सेंटेज में बिगड़ सकता है पूरा खेल

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डॉ हेंसन के मुताबिक, नॉर्मल हेल्‍दी इंसान के खून में ऑक्‍सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 पर्सेंट के बीच रहता है। 95 पर्सेंट से कम ऑक्‍सीजन लेवल फेफड़ों में किसी तरह की परेशानी की ओर इशारा करता है। अगर ऑक्‍सीजन लेवल 92 पर्सेंट से नीचे चला जाए तो समझ‍िए व्‍यक्ति की हालत बेहद गंभीर है और उसे अस्‍पताल ले जाने की जरूरत है। उसे सप्‍लीमेंट्री ऑक्‍सीजन की जरूरत भी पड़ सकती है।

कोविड निमोनिया का पता बताती है ये मशीन

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कोरोना वायरस स्‍क्रीनिंग और टेस्टिंग प्रोसेस में पल्‍स ऑक्‍सीमीटर की अहम भूमिका है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा था कि पोर्टेबल पल्‍स ऑक्‍सीमीटर से कोरोना मरीजों का अर्ली डायग्‍नोसिस हो सकता है जिससे मृत्‍यु-दर कम करने में मदद मिलेगी। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, पल्‍स ऑक्‍सीमीटर से मरीजों में ‘कोविड निमोनिया’ का पता चलता है। यह बीमारी कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों में कॉमन है।

ठीक महसूस हो तो नहीं है पल्‍स ऑक्‍सीमीटर की जरूरत

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डॉ हेंसन के मुताबिक, इस मशीन से कोरोना को डिटेक्‍ट नहीं कर सकते। अगर लोग ठीक महसूस कर रहे हैं, इसका मतलब है कि उनका ऑक्‍सीजन लेवल ठीक है। कोरोना केसेज में भी पल्‍स ऑक्‍सीमीटर्स का इस्‍तेमाल बीमार होने पर भी सबसे फायदेमंद है जिससे यह पता लगेगा कि आपको अस्‍पताल जाने की जरूरत है या नहीं। हालांकि, पल्‍स ऑक्‍सीमीटर्स से रीडिंग लेते वक्‍त ध्‍यान रहे कि नाखून पर कोई रंग न हो, नाखून लंबे न हों, हाथ ठंडे न हो, सर्कुलेशन खराब न हो, वर्ना मशीन ठीक से ऑक्‍सीजन लेवल डिटेक्‍ट नहीं कर पाएगी।



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