केरल में बीते दिनों यौन उत्पीड़न का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया था। एक नाबालिग बेटे ने अपनी मां पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। मामला केरल हाईकोर्ट तक पहुंचा। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तिरुवनंतपुरम के कडककवूर की मूल निवासी 35 वर्षीय आरोपी मां को जमानत दे दी। आरोपी महिला के पति द्वारा अपने नाबालिग बेटे का यौन शोषण करने की शिकायत के बाद महिला को POCSO अधिनियम के तहत 28 दिसंबर गिरफ्तार किया गया था।

सुनवाई के दौरान हालांकि राज्य सरकार ने महिला की जमानत याचिका का विरोध किया था और अदालत को बताया था, “उसके मोबाइल फोन से कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए थे। बेटे द्वारा उसके खिलाफ दिया गया बयान इसके लिए ठोस आधार है।”

क्या है पूरा मामला?
केरल में एक महिला पर लगे अपने नाबालिग बेटे के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप संबंधी मामले की महानिरीक्षक (आईजी) स्तर की जांच का 10 जनवरी को आदेश दिया गया था। महिला के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि महिला के दूसरे बेटे ने आरोप लगाया है कि उनके पिता ने ही भाई को ऐसा आरोप लगाने के लिये मजबूर किया था।

चार बच्चों की मां 37 वर्षीय महिला को उसके 14 साल के बेटे के ‘यौन उत्पीड़न’ के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार किया गया था। महिला की गिरफ्तारी उसके अलग हो चुके पति की शिकायत के आधार पर जिला बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट आने के बाद की गई थी। पुलिस की ओर से तब बताया गया, ”हमें लड़के के पिता की ओर से शिकायत मिली, जिसे बाल संरक्षण समिति को भेज दिया गया। समिति की रिपोर्ट आने पर लड़के की मां के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। हमने लड़के का बयान भी दर्ज कर लिया है।”

छोटे भाई ने पिता पर लगाया मां के खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर करने का आरोप
इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब लड़के के छोटे भाई ने को मीडिया में कहा कि उनके पिता ने ही बच्चों को मां के खिलाफ बयान देने के लिये मजबूर किया। खबरों के अनुसार पत्नी के साथ घरेलू मुद्दों के चलते अलग होने के बाद उसका पति 17,14 और नौ साल के तीन बेटों को अपने साथ खाड़ी देश में ले गया था। दंपती की छह साल की बेटी भी है जो अपनी नानी के घर रहती है।

व्यक्ति ने हाल ही में पुलिस में शिकायत दी थी जिसमें आरोप लगाया था कि उसका दूसरा बेटा जब उसके साथ रहने आया तो उसका व्यवहार कुछ बदला-बदला सा था। जब पूछताछ की तो उसने ”यौन उत्पीड़न” की बात बताई। बयानों में विरोधाभास होने के चलते राज्य के पुलिस प्रमुख लोकनाथ बेहरा ने इस मामले की पुलिस महानिरीक्षक हर्षिता अत्तालूरी से जांच कराने का आदेश दिया था।





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