अपने विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले भगोड़े जाकिर नाईक ने एक बार फिर से जहर उगलते हुए पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हिंदू मंदिर से हुई तोड़फोड़ का समर्थन किया है। जाकिर नाईक ने कहा है कि इस्लामिक देशों में मंदिर नहीं होने चाहिए और अगर मंदिर हैं तो उन्हें तोड़ दिया जाना चाहिए। इपने मुंह से जहर उगलने वाले जाकिर नाईक का मंदिरों और मूर्ति पूजा पर दिया ये शर्मनाक बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

जाकिर नाईक ने कहा है कि इस्लाम में कोई भी मूर्ति बनाना मना है फिर चाहे वो पेंटिंग हो, ड्रॉइंग हो, या फिर किसी जीवित पशु पक्षी की मूर्तिकारी हो या फिर इंसानों की मूर्ति हो या फिर पक्षियों या फिर कीड़ों की। ये सब कुछ इस्लाम में मना है और इसके कई सारे सबूत हैं।

अपनी बात साबित करने के लिए पैगंबर मोहम्मद का उदाहरण देते हुए कहा, “जब मोहम्मद काबा में लौटे, तो उन्होंने लगभग 360 मूर्तियों को तोड़ दिया जो काबा में थीं। इस्लामी देश में, मूर्ति नहीं बननी चाहिए या अगर है, तो उसे तोड़ दिया जाना चाहिए। एक मूर्ति इस्लामी देश में कहीं भी नहीं होनी चाहिए। और अगर यह कहीं है तो इसे तोड़ दिया जाना चाहिए।”

पाकिस्तान में तोड़ा गया मंदिर

बता दें कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी के सदस्यों के नेतृत्व में भीड़ द्वारा एक हिंदू मंदिर में की गई तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। इस मंदिर में एक हिंदू धार्मिक नेता की समाधि थी। मंदिर की दशकों पुरानी इमारत के जीर्णोद्धार के लिए हिंदू समुदाय ने स्थानीय अधिकारियों से अनुमति ली थी। कुछ स्थानीय मौलवियों और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फजल उर रहमान समूह) के समर्थकों की अगुवाई में भीड़ ने पुराने ढांचे के साथ-साथ नए निर्माण कार्य को ध्वस्त कर दिया।

पहले भी मंदिर के खिलाफ उगला है जहर

 

पिछले साल जुलाई में जाकिर नाईक ने कहते हुए इमरान खान सरकार को फटकार लगाई थी कि उन्होंने इस्लामाबाद में एक कृष्ण मंदिर के निर्माण की अनुमति देकर पाप किया है। उसका कहना था कि शरीयत के अनुसार, एक इस्लामिक राष्ट्र के लिए एक गैर-मुस्लिम के पूजा घर में भुगतान या दान करना हराम है।



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