किसानों को सलाना 6000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम किसान सम्मना निधि में भी फर्जीवाड़ा सामेन आया है। सिस्टम में सेंध लगाकर तमिलनाडु के फर्जी लाभार्थियों ने करोड़ों रुपये निकाल लिए। सरकार सख्त हुई तो अब तक 61 करोड़ रुपये वसूले गए।  अगर आप पात्र नहीं होने के बावजूद गलत तरीके से पैसे ले रहे हैं तो सरकार आपसे वसूली करेगी। गलत तरीके से लिया गया पैसा वापस न करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

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पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक करीब 90000 करोड़ रुपये से अधिक किसानों के बैंक अकाउंट में डायरेक्ट भेजे जा चुके हैं। तमिलनाडु में अब तक 5.95 लाख लाभार्थियों के खातों की जांच की गई है, जिसमें से 5.38 लाख फर्जी निकले। ऐसे लोगों से सरकार वसूली कर रही है। उन्हें हर हाल में पैसे लौटाने होंगे। वहीं इस फर्जीवाड़े में कर्मचारियों और अफसरों पर भी कार्रवाई की गई है।  96 कांट्रैक्ट कर्मचारियों की नौकरी चली गई है और 34 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों व 5 सहायक कृषि अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। 13 जिलों में संविदा कर्मियों सहित 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इन लोगों को नहीं मिलता लाभ

केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को लाभ नहीं मिलेगा। पिछले वित्तीय वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले किसान भी इसके लाभ से वंचित होंगे। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, वर्तमान या पूर्व मंत्री, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, एमएलसी, लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों को स्कीम से बाहर रखा गया है। यदि ऐसे लोगों ने लाभ लिया तो आधार अपने आप बता देगा। यदि किसी टैक्सपेयर देने वाले ने स्कीम की दो किस्त ले भी ली है तो वो तीसरी बार में पकड़ा जाएगा।

 



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