केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पाम ऑयल के आयात को कम करने के लिए एक अहम मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन को राष्ट्रीय खाद्य तेल–पाम ऑयल मिशन (एनएमईओ-ओपी) नाम दिया गया है। इसके तहत किसानों को पाम यानी ताड़ की खेती के लिए सहायता भी दी जाती है। अब सरकार ने सहायता राशि में इजाफा कर दिया है तो वहीं पौधा रोपने पर आर्थिक मदद की भी बात कही गई है। 

कितनी मिलती है मदद: पाम की खेती के लिए पहले प्रति हेक्टेयर 12 हजार रुपए दिये जाते थे, जिसे बढ़ाकर 29 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। इसके अलावा रख-रखाव और फसलों के दौरान भी सहायता में बढ़ोतरी की गई है। पुराने बागों को दोबारा चालू करने के लिए 250 रुपए प्रति पौधा के हिसाब से विशेष सहायता दी जा रही है, यानी एक पौधा रोपने पर 250 रुपए मिलेंगे।

देश में पौधारोपण साजो-सामान की कमी को दूर करने के लिए, बीजों की पैदावार करने वाले बागों को सहायता दी जाएगी। इसके तहत भारत के अन्य स्थानों में 15 हेक्टेयर के लिए 80 लाख रुपए तक की सहायता राशि दी जायेगी। वहीं, पूर्वोत्तर और अंडमान क्षेत्रों में यह सहायता राशि 15 हेक्टेयर पर एक करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। इसके अलावा शेष भारत में बीजों के बाग के लिए 40 लाख रुपए, इसके अलावा पूर्वोत्तर और अंडमान क्षेत्रों के लिये 50 लाख रुपए तय किये गए हैं। पूर्वोत्तर और अंडमान को विशेष सहायता का भी प्रावधान है।

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क्या है एनएमईओ-ओपी योजना: राष्ट्रीय खाद्य तेल–पाम ऑयल मिशन (एनएमईओ-ओपी) केंद्र द्वारा प्रायोजित एक नई योजना है। इसका फोकस पूर्वोत्तर के क्षेत्रों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर है। इस योजना के लिए 11,040 करोड़ रुपए का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। इसमें केंद्र सरकार 8,844 करोड़ रुपए का वहन करेगी। वहीं, 2,196 करोड़ राज्यों को वहन करना है। इसमें आय से अधिक खर्च होने की स्थिति में उस घाटे की भरपाई करने की भी व्यवस्था शामिल की गई है।



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