मेसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर यूजर्स को कोई मोहलत न देने की बात कही है। वॉट्सऐप ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि उसकी ओर से यूजर्स से नए प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए पूछा जा रहा है। सोशल मीडिया कंपनी ने अपने वकील कपिल सिब्बल के माध्यम से अदालत को बताया कि उसकी ओर से यूजर्स से प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करने के लिए कहा जा रहा है। यही नहीं जो यूजर इस पॉलिसी को स्वीकार नहीं करेंगे, उनके अकाउंट्स को धीरे-धीरे डिलीट कर दिया जाएगा। कपिल सिब्बल ने बताया, ‘हमने यूजर्स से पॉलिसी को लेकर सहमत होने का आग्रह किया है। यदि वे सहमत नहीं होंगे तो हम उन्हें डिलीट कर देंगे.., इस पॉलिसी को स्थगित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’ 

कंपनी की ओर से प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार्य करने की अनिवार्यता को लेकर विवाद छिड़ गया था। जनवरी में कंपनी की ओर से इस पॉलिसी का ऐलान किया गया था, जिसके बाद उसने इसे मई तक के लिए स्थगित कर दिया था। कंपनी की नई पॉलिसी के मुताबिक वॉट्सऐप को यह अधिकार होगा कि वह यूजर्स के इंटरेक्शन से जुड़ा कुछ डाटा पैरेंट कंपनी फेसबुक से साझा कर सके। हाई कोर्ट की ओर से फिलहाल मामले की सुनवाई को 3 जून तक के लिए टाल दिया गया है। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और याचिकाकर्ताओं की ओर से यथास्थिति की मांग की गई थी। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई को टालने का फैसला लिया। 

हालांकि वॉट्सऐप ने सुनवाई के दौरान स्टे लगाने पर विरोध किया। सीमा सिंह और लॉ स्टूडेंट चैतन्य रोहिल्ला की ओर से दायर याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान वॉट्सऐप ने यह बात कही। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि केंद्र सरकार को आदेश दिया जाए कि वह वॉट्सऐप से इस नई पॉलिसी को वापस लेने के लिए कहे। यदि ऐसा नहीं हो सकता है तो फिर यूजर्स को विकल्प मिले कि वे पॉलिसी को स्वीकार करें या फिर 4 जनवरी, 2021 के अपडेट को न चुनें। 

विरोध पर पीछे हट गई थी कंपनी, फिर पॉलिसी पर अड़ी
उस वक्त विरोध के चलते कंपनी ने अपनी पॉलिसी को वापस ले लिया था, लेकिन फरवरी में कहा था कि वह अपने फैसले पर आगे बढ़ेगी। बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से वॉट्सऐप को लेटर लिखकर प्राइवेसी पॉलिसी को टालने की मांग की थी, लेकिन इसके बाद भी कंपनी ने अपने फैसले को नहीं बदला है। 



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